बेंगलुरुः कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही सरकार ने कीमतें बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डाल दिया है।
कीमतों में बढ़ोतरी और सरकार पर आरोप
सिद्धारमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि 1 मई को 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹993 की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद इसकी कीमत बढ़कर ₹3,071.50 हो गई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव अवधि के दौरान जानबूझकर कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही इन्हें बढ़ा दिया गया। उनके अनुसार, पिछले चार महीनों में कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में छह बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल बोझ ₹1,518 तक बढ़ गया है।
“ऑर्गनाइज्ड लूट” का आरोप
मुख्यमंत्री ने इस बढ़ोतरी को “ऑर्गनाइज़्ड लूट” करार देते हुए कहा कि यह सरकार की नीति नहीं बल्कि जनता पर बोझ डालने की प्रक्रिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार नागरिकों की रक्षा करने के बजाय उन पर महंगाई का बोझ डाल रही है।
सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का हवाला देकर हर बार कीमतों का बोझ आम लोगों पर डाल दिया जाता है, जबकि सरकार को राहत देने की दिशा में काम करना चाहिए।
आम जनता पर असर का दावा
उन्होंने कहा कि यह बढ़ोतरी केवल कारोबार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका असर आम घरों तक पहुंचेगा। होटल, रेस्टोरेंट, छोटे ढाबे और कैटरिंग सेवाएं महंगी होंगी, जिससे खाने-पीने की कीमतें भी बढ़ेंगी।
सिद्धारमैया के अनुसार, शहरी मजदूर, दैनिक वेतनभोगी और छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, और रोजमर्रा की जरूरतें भी महंगी हो जाएंगी।
सरकार का पक्ष और मौजूदा स्थिति
वहीं, सरकार का कहना है कि बढ़ोतरी केवल कमर्शियल और बल्क एलपीजी सिलेंडरों पर लागू की गई है, जबकि घरेलू 14.2 किलो वाले सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। देशभर में लगभग 33 करोड़ परिवार घरेलू एलपीजी का उपयोग करते हैं, जिन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ा है।
सरकारी नियमों के अनुसार कमर्शियल एलपीजी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी होती हैं और इन्हें हर महीने संशोधित किया जाता है। हाल ही में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण भी यह बदलाव हुआ है।
वैश्विक बाजार का असर
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें हाल ही में काफी अस्थिर रही हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें भी हाल में उतार-चढ़ाव के बीच देखी गईं, जिसका असर आयात पर निर्भर भारत के एलपीजी बाजार पर पड़ा है।