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PM मोदी ने कूटनीतिक मिशनों को दिया मार्गदर्शन. ‘3T’ रणनीति पर फोकस: व्यापार, प्रौद्योगिकी व पर्यटन को बढ़ावा

2047 के लिए भारतीय कूटनीति के पुनर्गठन पर जोर, भारत की वैश्विक छवि और ‘भारत स्टोरी’ को मजबूत करने की योजना

By डॉ. अभिज्ञात

May 01, 2026 00:28 IST

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को विदेशों में स्थित भारत के राजनयिक मिशनों के प्रमुखों को देश के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। मोदी 11वें ‘हेड्स ऑफ मिशन्स कॉन्फ्रेंस’ को संबोधित कर रहे थे, जिसकी थीम ‘2047 के लिए भारतीय कूटनीति का पुनर्गठन’ रखी गई थी। नई दिल्ली में आयोजित यह तीन दिवसीय सम्मेलन मुख्य रूप से “भविष्य के लिए तैयार” भारतीय कूटनीति की रूपरेखा तय करने पर केंद्रित रहा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री के समक्ष ‘3T’ - व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन के प्रोत्साहन तथा “भारत की कहानी” को व्यापक रूप से प्रस्तुत करने पर प्रस्तुतियां दी गईं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विभिन्न मिशनों के प्रमुखों के विचार भी सुने, साथ ही वरिष्ठ और युवा राजनयिकों के दृष्टिकोणों को भी जाना, जिनमें भारत की वैश्विक भागीदारी को मजबूत करने पर चर्चा की गई। सोशल मीडिया पर साझा जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने अपने विचार और सुझाव भी रखे और 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की कूटनीतिक भागीदारी को दिशा देने वाला मार्गदर्शन दिया।

सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा, “नई दिल्ली में हेड्स ऑफ मिशन्स कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। हमने व्यापार, प्रौद्योगिकी और रणनीतिक साझेदारियों को आगे बढ़ाते हुए, साथ ही प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को और गहरा करते हुए, भारत की वैश्विक भागीदारी को मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की।”

आधिकारिक बयान के अनुसार मिशनों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विदेशों में भारत के राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन दिया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को सम्मेलन का उद्घाटन भाषण दिया।

तीन दिनों के दौरान मिशनों के प्रमुखों ने योग, विचार-मंथन सत्र, टेबल-टॉप अभ्यास और विषयगत चर्चाओं में भाग लिया। इन चर्चाओं में विभिन्न भू-राजनीतिक घटनाक्रम, उभरती प्रौद्योगिकियां, 3T , ‘भारत की कहानी’ तथा भविष्य के लिए तैयार कूटनीति जैसे विषय शामिल रहे।

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