नई दिल्ली : किरण रिजिजू के नेतृत्व वाले केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने हज यात्रियों के हवाई किराए में बढ़ोतरी को लेकर नया निर्देश जारी किया है जिसके बाद देश में राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। निर्देश के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के मार्ग परिवर्तन के कारण ईंधन लागत में भारी वृद्धि हुई है। इसी वजह से विमानन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की है। इस फैसले का सीधा असर हज यात्रियों पर पड़ा है।
पहले मुम्बई से सऊदी अरब तक हज यात्रा का हवाई किराया लगभग 90,844 रुपये था जिसे अब 10,000 रुपये बढ़ाकर लगभग 1,00,844 रुपये कर दिया गया है। सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली, मुम्बई या कोलकाता—किसी भी प्रस्थान स्थान से यात्रा करने वाले सभी हज यात्रियों को यह अतिरिक्त राशि देनी होगी। साथ ही यह अतिरिक्त भुगतान 15 मई तक जमा करना अनिवार्य किया गया है।
हज समिति ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है। समिति ने अपने बयान में कहा है कि जिन यात्रियों ने पहले ही पूरी राशि जमा कर दी है उनसे अचानक अतिरिक्त पैसे मांगना उचित नहीं है।
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “शोषण” बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या हज समिति के माध्यम से यात्रा करना सजा है। उन्होंने कहा कि अधिकतर हज यात्री सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों से होते हैं, जो वर्षों तक पैसे बचाकर हज यात्रा करते हैं। इसी तरह कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी सवाल उठाया कि जब सारी व्यवस्था पहले से तय थी तो अंतिम समय में किराया क्यों बढ़ाया गया।
विवाद बढ़ने पर केंद्रीय मंत्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ईंधन की लागत में वृद्धि के कारण यह कदम आवश्यक था। उन्होंने बताया कि पहले एयरलाइंस द्वारा प्रति यात्री 300 से 400 डॉलर अतिरिक्त शुल्क की मांग की गई थी, जिसे सरकार के हस्तक्षेप के बाद घटाकर लगभग 100 डॉलर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस को इस फैसले के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि यह वैश्विक परिस्थितियों के कारण लिया गया आर्थिक निर्णय है।