स्पेन : नौ गोल वाले रोमांचक मुकाबले के बाद भला कौन ऐसा पेनाल्टी-निर्भर मैच देखना चाहेगा? लेकिन यही तो फुटबॉल की असलियत है। मंगलवार रात जहां आक्रामक खेल की भरमार और डिफेंस में कई खामियां दिखीं वहीं बुधवार को तस्वीर पूरी तरह बदल गई और मुकाबला सतर्क रणनीति पर आधारित हो गया। मैच अंततः तीन पेनाल्टी की कहानी बनकर रह गया।
तीन पेनाल्टी में से दो पर गोल हुए लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तीसरी पेनाल्टी को लेकर हुई जिसे आर्सेनल को दिए जाने के बावजूद बाद में रद्द कर दिया गया। इस फैसले से आर्सेनल के कोच मिकेल आर्टेटा नाराज हो गए। ब्रिटिश मीडिया में भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
हाफ टाइम से ठीक पहले विक्टर गियोकेरेस ने पेनाल्टी से गोल कर आर्सेनल को बढ़त दिलाई। ब्रेक के कुछ ही समय बाद जूलियन अल्वारेज ने पेनाल्टी के जरिए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। असली विवाद 78वें मिनट में हुए नो-पेनाल्टी फैसले को लेकर खड़ा हुआ। बॉक्स में बुकायो साका के पास से गेंद लेकर एबेरेची एजे आगे बढ़ रहे थे तभी एटलेटिको के डेविड हांको ने उन्हें टैकल किया। रेफरी ने पहले पेनाल्टी का इशारा किया लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) की सलाह पर रिप्ले देखने के बाद अपना फैसला बदल दिया और पेनाल्टी नहीं दी। इसके बाद आर्सेनल के खिलाड़ी, समर्थक और कोच सभी ने तीखी नाराजगी जताई।
एक हल्का विवाद बेन व्हाइट के हैंडबॉल पर एटलेटिको को मिली पेनाल्टी को लेकर भी रहा। इससे पहले बायर्न म्यूनिख के अल्फोंसो डेविस के हैंडबॉल का मामला भी कुछ इसी तरह का था जहां पहले गेंद शरीर से टकराने के बाद हाथ से लगी थी। ब्रिटिश मीडिया का कहना है कि बायर्न के मामले में प्रीमियर लीग में शायद पेनाल्टी नहीं दी जाती लेकिन बेन व्हाइट के मामले में पेनाल्टी मिल सकती थी।
विवाद चाहे जितना भी हो अब सबकी नजर अगले सप्ताह एमिरेट्स स्टेडियम में होने वाले दूसरे चरण के मुकाबले पर है। क्या आर्सेनल अपने घरेलू मैदान पर निर्णायक प्रदर्शन कर पाएगा? पहले मैच में टीम एटलेटिको के खिलाफ पूरी तरह प्रभावी नहीं दिखी। एक समय एटलेटिको ने दबाव भी बना लिया था। ऐसे में अब डिएगो सिमियोने की चुनौती से पार पाना मिकेल आर्टेटा के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी।