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सौरव कोठारी बने तीसरी बार विश्व चैंपियन, पंकज आडवाणी को हराकर रचा इतिहास

कड़े मुकाबले में 1133–477 से जीत, चार दिन में सात मैच जीतकर बने चैंपियन।

कार्लो : विश्व चैंपियन बनने के बाद आमतौर पर शैम्पेन की बोतल खोलकर जश्न मनाया जाता है लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल अलग थी। आयरलैंड के कार्लो शहर में आईबीएसएफ वर्ल्ड बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीतने के बाद कोलकाता के टॉलीगंज निवासी सौरव कोठारी ने न तो शैम्पेन खोली और न ही परंपरा के अनुसार जीत का भाषण दे सके।

मंगलवार रात फाइनल में पंकज आडवाणी को 1133-477 के बड़े अंतर से हराकर जब उन्होंने ट्रॉफी अपने नाम की तब वह बेहद भावुक हो गए। अपने दिवंगत पिता मनोज कोठारी की याद में वह टूट गए थे और उसी भावनात्मक स्थिति में जीत का पूरा आनंद भी महसूस नहीं कर सके।

बुधवार को कार्लो से फोन पर सौरव कोठारी ने बताया की पिता की याद इतनी गहरी थी कि खिताब बचाने की खुशी को महसूस ही नहीं कर पाया। ऊपर से कार्लो में कड़ाके की ठंड थी और लगातार तीन घंटे के फाइनल मुकाबले के बाद मैं बेहद थक चुका था। होटल लौटकर मैंने पैकेट में रखा झालमुड़ी खाया खुद चाय बनाई और सो गया। डाइनिंग टेबल तक जाने का मन नहीं था।

करीब साढ़े तीन दशक पहले इसी शहर कोलकाता में उनके पिता मनोज कोठारी ने बिलियर्ड्स में पहला विश्व खिताब दिलाया था। उत्तर कोलकाता के निवासी मनोज कोठारी के हाथों ही बंगाल में क्यू स्पोर्ट्स की पहचान बनी। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय कोच के रूप में भी योगदान दिया। उसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए सौरव कोठारी राष्ट्रीय स्तर पर चमके और 2018 में पहली बार विश्व चैंपियन बने।

पिछले वर्ष भी कार्लो में उन्होंने 19 बार के विश्व चैंपियन पंकज आडवाणी को हराकर दूसरा खिताब जीता था। इस बार भी उन्होंने उसी प्रतिद्वंद्वी को हराकर लगातार दूसरी बार और कुल तीसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

सौरव कोठारी ने कहा की बार-बार ऐसा महसूस हुआ कि पिता मेरा हाथ पकड़कर हर शॉट खेलवा रहे हैं। यह जीत मैं उन्हें समर्पित करता हूं।

इस बार का विश्व चैंपियनशिप उनके अनुसार सबसे कठिन रहा क्योंकि दुनिया के कई दिग्गज खिलाड़ी इसमें शामिल हुए थे। दिग्गज खिलाड़ी माइक रसेल ने भी संन्यास तोड़कर वापसी की थी। ऐसे प्रतिस्पर्धी माहौल में सौरव कोठारी को चार दिनों में सात मुकाबले खेलकर खिताब जीतना पड़ा।

तीन बार विश्व चैंपियन बनने के अलावा वह पांच बार फाइनल में पहुंचकर उपविजेता भी रह चुके हैं। हाल के समय में पंकज आडवाणी को छोड़कर भारत में बिलियर्ड्स में ऐसी निरंतर सफलता किसी और के नाम नहीं है।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत में सौरव कोठारी पीछे चल रहे थे और पंकज आडवाणी ने 175 अंकों की बढ़त बना ली थी। इसके बाद सौरव ने लगातार 1 घंटा 2 मिनट तक पंकज को टेबल छूने का मौका नहीं दिया और 485 अंकों की शानदार पारी खेली। यही उनके जीत की नींव साबित हुई। बिलियर्ड्स में बहुत कम खिलाड़ी 500 के आसपास का ब्रेक बना पाते हैं।

शुक्रवार को सौरव कोठारी कोलकाता लौटेंगे। आगे के लक्ष्यों के बारे में उन्होंने कहा की भविष्य में एशियाई खेल और राष्ट्रमंडल खेलों में बिलियर्ड्स को शामिल किया जा सकता है। मेरा लक्ष्य इन खेलों में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

तीन बार के विश्व विजेता के शब्दों में आत्मविश्वास साफ झलकता है।

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