तिरुवनंंतपुरमः केरल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। एग्जिट पोल के नतीजे संकेत दे रहे हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रेंट (United Democratic Front) करीब एक दशक बाद सत्ता में वापसी कर सकता है।
केरल में 140 सदस्यीय विधानसभा के लिए आए विभिन्न एग्जिट पोल में यूडीएफ को 75 से 90 सीटें मिलने का अनुमान है, जो स्पष्ट बहुमत की ओर इशारा करता है। इसके विपरीत, लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रेंट (Left Democratic Front) यानी एलडीएफ की सीटों में उल्लेखनीय गिरावट की संभावना जताई गई है।
एजेंसियों के अनुसार, एक्सिस माय इंडिया ने यूडीएफ को 78-90 सीटें और एलडीएफ को 49-62 सीटें दी हैं। पीपुल्स पल्स ने यूडीएफ को 75-85 और एलडीएफ को 55-65 सीटों के बीच रखा है, जबकि वोट वाइब के मुताबिक यूडीएफ 70-80 सीटें जीत सकता है और एलडीएफ 58-68 सीटों तक सीमित रह सकता है। अन्य दलों में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) शामिल है, जिनके 3-4 सीटों पर सिमटने का अनुमान है।
केरल में 9 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था, लेकिन चुनाव आयोग (Election Commission of India) के निर्देशानुसार पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों के चुनाव खत्म होने के बाद ही एग्जिट पोल जारी किए गए।
हालांकि एग्जिट पोल को अंतिम परिणाम नहीं माना जा सकता। भारत जैसे विविध सामाजिक ढांचे वाले देश में कई बार अनुमान और वास्तविक नतीजों में अंतर देखने को मिला है। बावजूद इसके, 2021 के केरल चुनाव में एग्जिट पोल काफी हद तक सटीक साबित हुए थे, जब एलडीएफ ने 99 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी और यूडीएफ 41 सीटों पर सिमट गया था।
इस बार बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत भी चर्चा का विषय है। 2021 के 74.06% के मुकाबले इस बार 78.23% मतदान हुआ, जो 1987 के बाद सबसे अधिक है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे बदलाव की इच्छा का संकेत मान रहे हैं।
कांग्रेस नेता शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने भी कहा कि उनकी पार्टी पहले से जीत को लेकर आश्वस्त है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि एग्जिट पोल हमेशा पूरी तरह सही साबित हों, यह जरूरी नहीं है।
अब सभी की निगाहें 4 मई को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि केरल में सत्ता परिवर्तन होता है या लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रेंट (Left Democratic Front) एक बार फिर वापसी करता है।