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न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी ने कहा, किंग चार्ल्स से भारत को कोहिनूर लौटाने के लिए बोलूंगा

वर्ष 1849 में दूसरे एंगलो-सिख युद्ध के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 साल के राजा दलीप सिंह को लाहौर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया।

By Moumita Bhattacharya

Apr 30, 2026 15:34 IST

किंग चार्ल्स के साथ उनकी कोई भी मुलाकात कभी औपचारिक नहीं होती है। अगर उनको किंग चार्ल्स III से बात करने का मौका मिला तो वह उन्हें बेशकीमती हीरे कोहिनूर को भारत को वापस लौटाने के बारे में कहेंगे। एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरन ममदानी (Zohran Mamdani) ने यह बात कही।

गौरतलब है कि न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ममदानी की मां भारत में पैदा हुई थी और बाद में उन्होंने अपने पति और मेयर के पिता के साथ अपना जीवन यूगांडा में बिताया था। जहां आमतौर पर ब्रिटिश क्राउन के साथ मेयर मुलाकातें सख्त प्रोटोकॉल और सॉफ्ट डिप्लोमेसी तक सीमित रहती हैं।

वहीं ममदानी के इस बयान ने ऐतिहासिक जवाबदेही का मुद्दा जोड़ दिया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन के क्राउन किंग चार्ल्स III व क्विन कैमिला ने बुधवार (29 अप्रैल 2026) को वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का दौरा किया जहां 11/09 के हमले की 25वीं वर्षगांठ पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उनके साथ ममदानी भी शामिल थे।

भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा कोहिनूर

बता दें, कोहिनूर हीरा (मतलब रोशनी का पहाड़) सिर्फ कोई कीमती रत्न नहीं बल्कि यह भारत की संस्कृति का गौरव और साम्राज्यवाद को लगे घावों का प्रतीक भी माना जाता है। भारत में आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले का कोल्लूर खदान, हीरों का एक ऐतिहासिक खदान है। इसी खदान से जब कोहिनूर हीरे को निकाला गया था तब यह करीब 186 कैरेट का था। इसके बाद यह भारत के कई राजवंशों जैसे मुगल, सिख आदि के हाथों से होता हुआ क्विन विक्टोरिया के पास पहुंचा।

वर्ष 1849 में दूसरे एंगलो-सिख युद्ध के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 साल के राजा दलीप सिंह को लाहौर के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया। इस समझौते के तहत यह नायाब हीरा महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया गया।

वर्तमान में 105.6 कैरेट का यह हीरा क्वीन एलिज़ाबेथ की ताज में सजा हुआ है। जो टावर ऑफ लंदन में सुरक्षित रखा हुआ है।

भारत में कोहिनूर को अक्सर वापस न लौटायी गयी आखिरी संपत्ति के तौर पर देखा जाता है। ममदानी की टिप्पणी को ब्रिटिश औपनिवेशकों द्वारा लूटी गयी विरासत के साथ भावनात्मक संबंध के तौर पर देखा जा रहा है। भारत में अक्सर कोहिनूर को वापस लाने की मांग उठती रही है वहीं ब्रिटिश सरकार का दावा है कि यह हीरा उन्हें एक वैध संधि के तहत मिला था। इसलिए इसपर ब्रिटेन का ही अधिकार माना जाता है।

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