ईरान वॉर के बीच ट्रंप पर हमले का प्रयास किया गया है, इसलिए सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या हमलावर का कोई विदेशी कनेक्शन भी है ? इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव कैंपेन के दौरान 13 जुलाई, 2024 को ट्रंप पर हमला हुआ था। उस दौरान ट्रंप के कान के पास से गोली छूकर निकली थी। चुनाव के दौरान यह एक बड़ा मुद्दा बना था। इस हमले को लेकर ईरान पर आरोप लग रहे थे।
वहीं इसके बाद सितंबर, 2024 में ही वेस्ट पाम बीच में ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ क्लब के पास एक शख़्स रायफल के साथ गिरफ़्तार हुआ था, यह माना जा रहा था कि वो ट्रंप पर हमले की साजिश रच रहा था। ताजा घटना 25 अप्रैल, 2026 की है, जब ट्रंप पत्रकारों के डिनर समारोह में शामिल हुए थे। इस बार हमलावर होटल में प्रवेश करने में सफल रहा और गोलीबारी की।
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप शनिवार की रात व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के डिनर कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे हुए थे। यह कार्यक्रम वॉशिंगटन डीसी के होटल हिल्टन के एक हिस्से में आयोजित किया जा रहा था। इसी दौरान एक शख़्स ने सिक्योरिटी प्वाइंट के पास फायरिंग की और पूरे कार्यक्रम में अफरातफरी मच गई।
सीक्रेट सर्विस ने संभाला मोर्चा
सीक्रेट सर्विस ने तुरंत मोर्चा संभाला और राष्ट्रपति ट्रंप को होटल हिल्टन से सुरक्षित बाहर निकालकर हाई सिक्योरिटी कार में ले गए, जहां से उन्हें व्हाइट हाउस पहुंचाया गया। राष्ट्रपति ट्रंप, अमेरिका की प्रथम महिला, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत अन्य वरिष्ठ नेता और अधिकारी पूर्ण रूप से सुरक्षित हैं। इस हमले के लिए दौरान सीक्रेट सर्विस के एक अधिकारी को भी गोली लगी है, जो कि फिलहाल खतरे से बाहर है।
कौन था हमलावर ?
हमलावर कॉल थोमस एलेन अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया का रहने वाला है और 31 साल का यह हमलावर पेशे से अध्यापक बताया जा रहा है। जिसे तुरंत ही सीक्रेट सर्विस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसे जल्द कोर्ट में पेश किया जाएगा। FBI और अन्य जांच एजेंसियाँ मामले की हर एंगल से जांच कर रही हैं। अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA भी इस मामले की जांच में जुटी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस हमलावर का असल मकसद क्या था ? आखिरकार हमलावर हाई सिक्योरिटी जोन में कैसे पहुंचा और उसे अत्याधुनिक हथियार किसने मुहैया कराए हैं ?
सुरक्षा में बड़ी चूक पर सवाल
कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा इतनी चाक चौबंद होती है कि परिंदा में पर नहीं मार सकता है। लेकिन इतनी तगड़ी सुरक्षा के बावजूद भी अगर हमलावर ट्रंप के इतना करीब पहुंच गया तो यकीनन यह सुरक्षा में बड़ी चूक कही जा सकती है। लेकिन सीक्रेट सर्विस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि वो अमेरिका के राष्ट्रपति की सुरक्षा कितनी मुस्तैदी से करते हैं।