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चुनाव आयोग ने दिया पहले चरण के मतदानकर्मियों को दूसरे चरण में भी ड्यूटी पर भेजने का आदेश

जिन जिलों में पहले चरण का चुनाव हो चुका है वहां से प्रिसाइडिंग अधिकारियों और फर्स्ट-सेकंड-थर्ड पोलिंग अधिकारियों को दूसरे चरण के मतदान के लिए ड्यूटी करनी होगी।

By Moumita Bhattacharya

Apr 26, 2026 11:35 IST

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होने वाला है लेकिन कर्मचारियों की कमी की समस्या से चुनाव आयोग परेशान है। इस समस्या का समाधान करने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑफिस (CEO) से एक विज्ञप्ति जारी की गयी है। यह विज्ञप्ति जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) के लिए जारी की गयी है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि जिन जिलों में पहले चरण का चुनाव हो चुका है वहां से प्रिसाइडिंग अधिकारियों और फर्स्ट-सेकंड-थर्ड पोलिंग अधिकारियों को दूसरे चरण के मतदान के लिए ड्यूटी करनी होगी। हालांकि यह आदेश सिर्फ पुरुष मतदानकर्मियों के लिए ही जारी किया गया है।

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CEO ऑफिस के आदेशानुसार सिर्फ केंद्रीय अथवा राष्ट्रीयकृत संस्थाओं के पुरुष कर्मचारियों को ही दूसरे चरण के चुनाव में ड्यूटी दी जाएगी। इसके साथ ही विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि पहले चरण के कौन-कौन से अधिकारियों को दूसरे चरण में किन-किन जिलों में भेजना होगा।

आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले चरण के 17000 से अधिक प्रिसाइडिंग और पोलिंग अधिकारियों को दूसरे चरण में भी ड्यूटी दी जाएगी। इसमें प्रिसाइडिंग अधिकारियों की संख्या 3600 से अधिक बतायी जाती है।

CEO ऑफिस की इस विज्ञप्ति के बाद सवाल उठ रहा है कि किस चरण के कितने बूथ पर कितने प्रिसाइडिंग अथवा पोलिंग अधिकारियों की जरूरत होगी, इसका फैसला तो पहले ही कर लिया जाना चाहिए। फिर चुनाव से 72 घंटे पहले अचानक यह आदेश क्यों जारी किया जा रहा है?

साथ ही एक सवाल यह भी है कि पहले चरण में जिन जिलों में मतदान हो चुका है वहां से सिर्फ केंद्रीय अथवा केंद्रीयकृत कंपनियों के अधिकारियों को ही क्यों दूसरे चरण के मतदान में ड्यूटी दी जा रही है? राज्य सरकार के अधिकारियों को क्यों नहीं? पहले चरण के चुनाव के बाद तो अधिकारी काफी थक चुके होंगे। ऐसे में क्या उन्हें दूसरे जिलों में भेजना सही होगा? शनिवार की रात तक इस बाबत आयोग से कोई जवाब नहीं मिल सका है।

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