नई दिल्ली : एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में आने वाले पांच वर्षों में अरबपतियों की संख्या में बड़ी वृद्धि देखने को मिल सकती है। Arton Capital की रिपोर्ट “ग्लोबल सिटिजन: एंटरप्रेन्योरशिप, मोबिलिटी एंड द अल्ट्रा वेल्दी” के मुताबिक दुनिया के हर पांच अति-धनी लोगों में से एक विदेशी मूल का है। इस वैश्विक बदलाव में भारतीय सबसे आगे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि अब भारतीय धनकुबेर केवल देश तक सीमित नहीं हैं बल्कि विदेशों में भी तेजी से निवेश कर रहे हैं। अमेरिका में विदेशी मूल के अति-धनी लोगों में भारतीय मूल के लोग सबसे अधिक हैं खासकर सूचना प्रौद्योगिकी और वित्त क्षेत्र में उनका दबदबा है। लंदन में भी विदेशी अमीरों के बीच भारतीयों की मजबूत उपस्थिति है।
वहीं Knight Frank की “द वेल्थ रिपोर्ट 2026” के अनुसार भारत में इस समय 19,877 अति-धनी व्यक्ति हैं, जिनकी संपत्ति 30 मिलियन डॉलर (करीब 282.75 करोड़ रुपये) या उससे अधिक है। यह संख्या 2031 तक बढ़कर 25,217 हो सकती है। साथ ही, अरबपतियों की संख्या 207 से बढ़कर 313 तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि तकनीक, उद्योग और शेयर बाजार में तेजी से हो रही वृद्धि के कारण संपत्ति निर्माण में जबरदस्त उछाल आया है। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक अनिश्चितता, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और आर्थिक असमानता जैसी चुनौतियों के बावजूद भारत में संपत्ति बढ़ने की रफ्तार तेज बनी हुई है। पिछले पांच वर्षों में भारत में अरबपतियों की संख्या 58% बढ़ चुकी है।
देश में सबसे अधिक अति-धनी लोग मुंबई में रहते हैं जहां कुल अति-धनी आबादी का 35.4% हिस्सा बसता है। इससे मुंबई न केवल वित्तीय राजधानी बल्कि संपत्ति निर्माण का प्रमुख केंद्र भी बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर अति-धनी लोगों की संख्या 2021 के 5,51,435 से बढ़कर अब 7,13,626 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत इस सूची में फिलहाल छठे स्थान पर है और आने वाले समय में और ऊपर जा सकता है।
कंपनी के चेयरमैन शिशिर बैजल के अनुसार भारत में बढ़ती संपत्ति देश की बदलती अर्थव्यवस्था का संकेत है। उद्यमिता, मजबूत शेयर बाजार, बेहतर वित्तीय ढांचा, डिजिटलाइजेशन, निजी निवेश और पारिवारिक व्यवसायों के आधुनिकीकरण ने इस वृद्धि को गति दी है। यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था में अति-धनी वर्ग की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी।