शिमला : हिमाचल प्रदेश में महिला आरक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने में देरी कर रही है। संगठन ने इस मुद्दे पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी से समर्थन मांगा है।
बुधवार को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में एआईसीसी सचिव और हिमाचल प्रदेश महिला कांग्रेस प्रभारी सुरभि वर्मा ने कहा कि उनका संगठन विधानमंडलों और पार्टी ढांचे में महिलाओं को एक-तिहाई प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए ठोस व्यवस्था चाहता है। उन्होंने बताया कि महिला कांग्रेस, गांधी से मुलाकात के दौरान इस मांग को प्रमुखता से उठाएगी।
सुरभि वर्मा ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक जिसे ‘नारी शक्ति वंदन बिल’ के नाम से भी जाना जाता है को वर्तमान स्वरूप में लागू किया जाना चाहिए। इसके तहत लोकसभा की सभी 543 सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस विधेयक को लागू करने की प्रक्रिया में बाधा डाल रही है और अब इसका दोष विपक्षी दलों पर डालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि देशभर की महिलाएं अपने अधिकारों के लिए एकजुट हैं और मिलकर 33 प्रतिशत आरक्षण को वास्तविकता बनाया जा सकता है।
वर्मा ने यह भी बताया कि हिमाचल प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों के कारण लागू आचार संहिता के चलते महिला कांग्रेस ने फिलहाल अपने विरोध कार्यक्रमों को रोक दिया है लेकिन चुनाव प्रक्रिया खत्म होते ही आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आचार संहिता हटने के बाद भाजपा को इस मुद्दे पर कड़ा जवाब दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि देशभर में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता महिलाओं को संगठित कर रही हैं और दिल्ली सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
अभियान के तहत संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक लाख पोस्टकार्ड भेजेगा जिनमें संसद में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग की जाएगी।
सुरभि वर्मा ने देश की महिलाओं से इस आंदोलन में जुड़ने की अपील की और कहा कि सामूहिक प्रयास से लंबे समय से लंबित यह मांग पूरी की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कांगड़ा जिले में राहुल गांधी के साथ होने वाली बैठक इस मुद्दे को उठाने और राजनीतिक समर्थन हासिल करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।