नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच भारतीय रुपये में गुरुवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरकर 95.32 के स्तर पर पहुंच गया जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
इससे पहले मार्च महीने में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान पहली बार रुपया 95 के पार गया था और 95.22 के स्तर तक पहुंचा था। अब उस रिकॉर्ड को भी पार करते हुए रुपये में इस साल अब तक 6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया।
मार्च में भी कच्चा तेल 120 डॉलर के ऊपर पहुंचा था लेकिन युद्ध में अस्थायी विराम के बाद कीमतें घटकर करीब 90 डॉलर तक आ गई थीं। अब संयुक्त अरब अमीरात के ओपेक से बाहर होने और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी की चेतावनी के कारण तेल बाजार में फिर अस्थिरता बढ़ गई है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का अधिकांश तेल बाहर से मंगाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
तेल की कीमतों में उछाल के साथ डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। इसके अलावा पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाला है। इन सभी कारणों के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा और यह रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।