🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

बिकवाली और कच्चे तेल की तेजी से बाजार दबाव में, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में बंद

वैश्विक अस्थिरता, AI ट्रेड शिफ्ट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों का भरोसा डगमगाया

By श्वेता सिंह

Apr 28, 2026 17:17 IST

नई दिल्ली: मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोर रुख देखने को मिला, जहां विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने बाजार की धारणा पर दबाव डाला।

BSE Sensex 416.72 अंक यानी 0.54 प्रतिशत गिरकर 76,886.91 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty 50 97 अंक यानी 0.40 प्रतिशत टूटकर 23,995.70 पर आ गया।

कच्चे तेल की तेजी ने बढ़ाई चिंता

वैश्विक कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 2.84 प्रतिशत की बढ़त के साथ 111.30 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि क्रूड ऑयल 3.40 प्रतिशत बढ़कर 99.65 डॉलर पर कारोबार करता दिखा।

सोने की कीमतों में इसके उलट गिरावट देखी गई और यह 1.54 प्रतिशत टूटकर 4,611.21 डॉलर पर आ गया।

एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी का रुख रहा। जापान का Nikkei 225 1.16 प्रतिशत गिरा, जबकि हांगकांग का Hang Seng Index 1.09 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

हालांकि अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की मजबूती दिखी, जहां डाउ जोन्स फ्यूचर्स 0.35 प्रतिशत और नैस्डैक 0.20 प्रतिशत ऊपर रहे।

दिन की शुरुआत भी रही कमजोर

बाजार की शुरुआत ही गिरावट के साथ हुई थी। सेंसेक्स 208.84 अंक गिरकर 77,094.79 पर खुला, जबकि निफ्टी 42.80 अंक की गिरावट के साथ 24,049.90 पर खुला।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह दबाव विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, वैश्विक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बना हुआ है।

AI ट्रेड ने बदला वैश्विक निवेश रुख

वी. के. विजयुकमार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित शेयरों की तेजी ने निवेश प्रवाह को प्रभावित किया है।

उनके अनुसार, कुछ चुनिंदा AI स्टॉक्स की भारी तेजी के कारण वैश्विक फंड “मोमेंटम-चेजिंग” रणनीति अपना रहे हैं, जिससे भारत जैसे बाजारों से निकासी हो रही है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AI सेक्टर में करेक्शन आता है तो विदेशी निवेशक दोबारा उभरते बाजारों, खासकर भारत की ओर रुख कर सकते हैं। इस बीच, मजबूत फंडामेंटल वाले लार्ज कैप स्टॉक्स बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि मिड और स्मॉल कैप सेगमेंट अपेक्षाकृत मजबूत बने रह सकते हैं।

कुल मिलाकर, वैश्विक संकेतों की कमजोरी, कच्चे तेल की तेजी और एफआईआई की लगातार बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार को दबाव में रखा है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक ट्रेंड्स और कमोडिटी बाजार की चाल पर टिकी है।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

Articles you may like: