नई दिल्ली: भारत और न्यूज़ीलैंड ने सोमवार को एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर किए, जिसे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस समझौते से व्यापक स्तर पर शुल्कों में कमी, बाज़ार तक बेहतर पहुंच और सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
यह समझौता भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूज़ीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के बीच हुआ। इसे भारत के सबसे तेज़ी से संपन्न हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों में गिना जा रहा है। मार्च 2025 में शुरू हुई वार्ताएं दिसंबर 2025 में पूरी हो गई थीं और महज़ नौ महीनों में यह समझौता हस्ताक्षर तक पहुंच गया, जो इसे विशेष बनाता है।
इससे पहले भी कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन भारत के डेयरी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों के कारण प्रक्रिया अटक गई थी। नए समझौते में इन संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है।
समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का वादा किया है। साथ ही व्यापारिक अवरोधों को कम करने, मानकों को सरल बनाने और विवाद निपटान प्रणाली को बेहतर करने पर भी सहमति बनी है। दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार में हाल के वर्षों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। वहीं सेवाओं के क्षेत्र में तेजी आई ह-2024 में भारत का न्यूज़ीलैंड को सेवा निर्यात लगभग 13 प्रतिशत बढ़कर 634 मिलियन अमेरिकी डॉलर पहुंच गया, जबकि आयात लगभग 7 प्रतिशत बढ़कर 611 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा।
भारत से प्रमुख निर्यात में दवाइयाँ, मशीनरी, वस्त्र और बहुमूल्य रत्न शामिल हैं, जबकि न्यूज़ीलैंड से आयात में ऊन, धातुएं, फल, मेवे और एल्यूमिनियम प्रमुख हैं।
इस समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड कई उत्पादों पर तुरंत शुल्क समाप्त करेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। वर्तमान में वस्त्र, चमड़े के सामान, कालीन, सिरेमिक और ऑटोमोबाइल पुर्जों जैसे उत्पादों पर लगभग 10 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। कृषि उत्पादों जैसे चाय, कॉफी और मसालों को भी बेहतर बाज़ार पहुंच मिलने की संभावना है।
भारत ने लगभग 70 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाज़ार खोलने की पेशकश की है, जबकि करीब 30 प्रतिशत को बाहर रखा गया है। लगभग 30 प्रतिशत वस्तुओं पर तुरंत शुल्क समाप्त होगा, जबकि एक-तिहाई से अधिक पर चरणबद्ध कमी लागू होगी। कुछ वस्तुओं पर सीमित कटौती और कुछ पर कोटा आधारित रियायतें लागू होंगी। डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर, मक्खन और दही को इस समझौते से बाहर रखा गया है। इसके अलावा कुछ पशु उत्पाद, चीनी, तेल, रत्न एवं आभूषण और कुछ धातुएं भी शामिल नहीं हैं।
हालांकि सेब, कीवी फल और मनुका शहद जैसे कुछ कृषि उत्पादों को टैरिफ रेट कोटा के तहत अनुमति दी जाएगी, जिससे नियंत्रित आयात के साथ तकनीकी सहयोग और उत्पादकता में सुधार को बढ़ावा मिलेगा। सेवाओं के क्षेत्र में न्यूज़ीलैंड ने 100 से अधिक क्षेत्रों को भारतीय कंपनियों के लिए खोलने पर सहमति दी है। बदले में भारत भी 100 से अधिक सेवा क्षेत्रों में न्यूज़ीलैंड को अवसर देगा, हालांकि प्राथमिकता सीमित क्षेत्रों में दी जाएगी।
इस समझौते में पेशेवरों और छात्रों की आवाजाही को आसान बनाने के प्रावधान भी शामिल हैं। भारतीय छात्रों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों में पढ़ाई के बाद काम करने के अवसर बढ़ाए जाएंगे। साथ ही आईटी, स्वास्थ्य, शिक्षा, निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में कुशल भारतीय पेशेवरों के लिए किसी भी समय 5,000 वीज़ा उपलब्ध होंगे।
समझौते को लागू करने से पहले दोनों देशों में इसकी पुष्टि आवश्यक होगी। भारत में इसे कार्यकारी मंजूरी के जरिए पूरा किया जाएगा, जबकि न्यूज़ीलैंड में संसदीय स्वीकृति में कुछ महीने लग सकते हैं।
समझौता लागू होने के बाद व्यापार और निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, साथ ही वस्तुओं, सेवाओं और मानव संसाधन के क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर भी खुलेंगे।