महाराष्ट्र : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नागपुर के जमथा क्षेत्र में आयोजित ‘भारत दुर्गा शक्तिस्थल’ और धर्म सभा के दौरान कई संवेदनशील और चर्चित मुद्दों पर अपनी बात रखी। अपने संबोधन में उन्होंने जनसंख्या संतुलन तथाकथित “लव जिहाद”, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा और हिंदू राष्ट्र’ की अपनी परिकल्पना जैसे विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने भाषण में “लव जिहाद” को “धीमा जहर” बताते हुए कहा कि यह मध्य प्रदेश से महाराष्ट्र तक अपनी जड़ें फैला रहा है। उन्होंने इस विषय को लेकर चिंता जताई और इसे “धर्म विरोधी शक्तियों” से जोड़कर देखा। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में एक वर्ष के भीतर इस तरह के 280 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि “प्रेम करना गलत नहीं है लेकिन नाम बदलकर और भेष बदलकर “संस्कृति और मूल्यों का उल्लंघन करना अपराध है।”
सभा के दौरान उन्होंने एक विवादित टिप्पणी करते हुए कहा “आप कुछ भी बनें लेकिन बुर्का पहनने वाली महिला कभी न बनें।” साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से अपील की कि वह मध्य प्रदेश की तरह सख्त कानून लागू करे।
परिवार और राष्ट्रवाद पर अपने विचार रखते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने चार बच्चों वाले बयान को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को राष्ट्रवादी बनाना है। उनके शब्दों में चाहे आप उसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को समर्पित करें सेना में भेजें या कलेक्टर बनाएं लेकिन उसकी विचारधारा संघ के अनुरूप होनी चाहिए ताकि वह हिंदुत्व का ध्वज आगे बढ़ा सके।
अपने निजी जीवन को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की और कहा कि वह भविष्य में ‘गृहस्थ जीवन’ में प्रवेश करने का विचार रखते हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर की इच्छा के अनुसार वह हिंदुओं की जनसंख्या बढ़ाने में योगदान देना चाहते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने ऊपर लगने वाले अंधविश्वास फैलाने के आरोपों का भी जवाब दिया। उन्होंने आस्था और अंधविश्वास के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि समझ के आधार पर किया गया विश्वास आस्था है जबकि बिना समझ के किया गया विश्वास अंधविश्वास है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को स्वयं से नहीं बल्कि भगवान बालाजी हनुमान से जोड़ना है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि लोगों को हनुमान मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना अंधविश्वास है, तो देश के सभी धर्मों को भी उसी श्रेणी में रखना होगा।
छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर अपने पहले दिए गए बयान पर हुए विवाद के संदर्भ में उन्होंने सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके बयान को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने शिवाजी महाराज को ‘स्वराज’ की अवधारणा और हिंदू राष्ट्र की विचारधारा का प्रमुख प्रेरणास्रोत बताया और कहा कि यदि हम आपस में ही लड़ेंगे तो दूसरों को अवसर मिल जाएगा।
इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस मंच से यह बयान दिया गया वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं ने इस पर कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। राउत ने आरोप लगाया कि शिवाजी महाराज के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और यह सब मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी में हुआ।
गौरतलब है कि इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत सहित कई प्रमुख नेता उपस्थित थे। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है मध्य प्रदेश स्थित बागेश्वर धाम मंदिर के प्रमुख आध्यात्मिक नेता हैं।