श्रीनगर : अमरनाथ यात्रा को लेकर एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उससे जुड़े कुछ छाया संगठन अमरनाथ यात्रा के विभिन्न मार्गों और महत्वपूर्ण स्थानों का गहन विश्लेषण कर रहे हैं। इस इनपुट के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। तथाकथित ‘अमरनाथ सिक्योरिटी ग्रिड’ के तहत आने वाले सभी प्रमुख प्वाइंट्स पर सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया गया है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस के जम्मू–सांबा–कठुआ रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) श्रीधर पाटिल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से लेकर संवेदनशील इलाकों तक सुरक्षा बल पूरी तरह से सतर्क और तैनात हैं। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कठुआ जिला पुलिस के सभी अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की जिसमें सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बैठक में हर प्वाइंट पर निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। इसके तहत नाका चेकिंग को सख्त कर दिया गया है और गश्ती दलों की संख्या में भी इजाफा किया गया है।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक प्रस्तावित है। यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं, जिसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां कोई भी जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। अमरनाथ गुफा मंदिर तक पहुंचने के लिए मुख्य रूप से दो मार्ग हैं। पहला पारंपरिक और लंबा मार्ग पहलगाम से होकर गुजरता है। यह मार्ग लगभग 47 किलोमीटर लंबा है जिसमें जम्मू, पहलगाम, चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंचतरणी जैसे प्रमुख पड़ाव आते हैं। इस रास्ते से यात्रा पूरी करने में आमतौर पर 3 से 4 दिन का समय लगता है।
इसी पहलगाम मार्ग पर पिछले वर्ष 22 अप्रैल को बड़ा आतंकी हमला हुआ था जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों ने 25 पर्यटकों समेत कुल 26 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद से ही यह मार्ग सुरक्षा एजेंसियों के लिए अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है।
दूसरा मार्ग बालटाल की ओर से जाता है जो अपेक्षाकृत छोटा लेकिन काफी कठिन और खड़ी चढ़ाई वाला रास्ता है। इस मार्ग में जम्मू से सोनमर्ग, बालटाल, डोमैल, बरारी मार्ग और संगम होते हुए अमरनाथ गुफा तक पहुंचा जाता है। इस रास्ते से यात्रा एक से दो दिन में पूरी की जा सकती है लेकिन कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यह मार्ग चुनौतीपूर्ण माना जाता है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और हर संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न कराने की तैयारियां की जा रही हैं।