नयी दिल्लीः भारत के दिग्गज फोटोग्राफर रघु राय का आज 26 अप्रैल 2026 को 83 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्हें भारतीय फोटो-जर्नलिज़्म का एक महान स्तंभ माना जाता था, जिन्होंने अपने कैमरे के जरिए देश की आत्मा को दुनिया के सामने रखा। उनके निधन को कई लोगों ने भारतीय फोटो पत्रकारिता में एक युग का अंत बताया। लोगों की मान्यता है कि उनका काम केवल तस्वीरें नहीं था, बल्कि वह भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गया, जिसने आने वाली पीढ़ियों को लगातार प्रेरित किया।
जीवन परिचय और प्रारंभिक दौर
रघु राय का जन्म 18 दिसंबर 1942 को झंग में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उन्होंने अपनी प्रतिभा और दृष्टि के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वे प्रसिद्ध फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसों के शिष्य रहे, जिन्होंने 1977 में उन्हें मैग्नम फोटोज से जुड़ने के लिए नामित किया था। इसे विश्व स्तर पर उनकी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
पत्रकारिता करियर की शुरुआती पहचान
रघु राय के करियर के शुरुआती दौर में उनका जुड़ाव प्रतिष्ठित अखबार The Statesman से रहा, जहां से उन्होंने फोटो पत्रकारिता में अपनी मजबूत पहचान बनाई और आगे चलकर वैश्विक स्तर तक पहुंचे।
फोटोग्राफी करियर और प्रमुख कार्य
रघु राय का काम आधुनिक भारत का एक दृश्य इतिहास माना जाता है। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के बाद की स्थितियों को बेहद प्रभावशाली ढंग से कैमरे में कैद किया। इसके अलावा मदर टेरेसा और इंदिरा गांधी जैसे व्यक्तित्वों के उनके चित्र भी बेहद प्रसिद्ध हुए। भारतीय सड़कों, गंगा के घाटों और आम जनजीवन की उनकी तस्वीरें आज भी देश की पहचान का हिस्सा हैं।
लेखन और पुस्तकों के माध्यम से योगदान
फोटोग्राफी के अलावा रघु राय ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का लेखन भी किया। उनकी प्रमुख कृतियों में Indira Gandhi, The Sikhs, Raghu Rai’s India और Mother Teresa शामिल हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने अपने विज़ुअल अनुभवों को शब्दों में भी प्रस्तुत किया।
सम्मान और उपलब्धियां
रघु राय को वर्ष 1972 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। 2017 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से नवाजा। यह सम्मान उनके दशकों लंबे योगदान को मान्यता देने के लिए दिया गया। रघु राय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें 2018 में लूसी अवॉर्ड और 2019 में अकादेमी दे बो-आर्ट्स फोटोग्राफी अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
परिवार और अंतिम संस्कार
रघु राय अपने पीछे पत्नी गुरमीत राय और अपने बच्चों नितिन, लगन, अवनी और पूर्वाई को छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में किया गया।
राजनीतिक नेताओं की श्रद्धांजलि
रघु राय के निधन की खबर के बाद देशभर के राजनीतिक नेताओं, कलाकारों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा दुख व्यक्त किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा कि रघु राय देश के अग्रणी फोटोग्राफरों में से एक थे और पांच दशकों से अधिक समय तक उन्होंने फोटो पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी। उन्होंने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और इंदिरा गांधी जैसी हस्तियों की तस्वीरों का विशेष उल्लेख किया, जो आज भी लोगों की स्मृति में जीवित हैं।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि रघु राय ने छह दशकों से अधिक समय तक अपने कैमरे से भारत की आत्मा, उसके लोग, संघर्ष, खुशियां और ऐतिहासिक क्षण को संजोया। राय ने सिर्फ तस्वीरें नहीं लीं बल्कि देश की सामूहिक स्मृति को सुरक्षित किया।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने रघु राय को दुनिया के सबसे श्रेष्ठ दृश्य कथाकारों में से एक बताया। उन्होंने अपने बचपन की यादें साझा करते हुए कहा कि राय उनके पिता के सहकर्मी थे और उन्होंने पत्रकारिता की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया।
आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने कहा कि रघु राय उन दुर्लभ लोगों में थे जो सच्चाई को देखने और दिखाने से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने सत्ता, पीड़ा, आम लोगों और इतिहास हर पहलू को बिना समझौते के कैमरे में कैद किया। बांग्लादेश युद्ध से लेकर भोपाल गैस त्रासदी तक, उन्होंने हर सच्चाई को सामने लाने का साहस दिखाया।
जम्मू-कश्मीर के नेता वहीद उर रहमान पारा ने कहा कि रघु राय की तस्वीरों ने भारत की आत्मा को हमेशा के लिए संजोकर रखा है और उनका काम आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहेगा।
सांस्कृतिक जगत से श्रद्धांजलि की लहर
रघु राय के निधन पर केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि साहित्य, सिनेमा और आध्यात्मिक जगत से भी गहरी संवेदनाएं सामने आईं। कई प्रमुख हस्तियों ने उन्हें एक मौन कहानीकार और प्रकाश के अद्भुत व्याख्याकार के रूप में याद किया।
फोटोग्राफर अतुल कस्बेकर ने उन्हें भारत का अब तक का सबसे महान फोटोग्राफर बताया और कहा कि उनके जाने से एक युग का अंत हो गया। अभिनेत्री दिया मिर्ज़ा और फिल्मकार स्वानंद किरकिरे सहित कई अन्य हस्तियों ने भी श्रद्धांजलि दी। एक श्रद्धांजलि में कहा गया कि उन्होंने भारत के इतिहास को इस तरह कैद किया कि वह पीढ़ियों तक देखा और समझा जाता रहेगा।
लेखक और गीतकार वरुण ग्रोवर ने बेहद भावनात्मक शब्दों में श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रघु राय जैसे शांत और संवेदनशील कलाकार का जाना एक गहरा खालीपन छोड़ गया है। उन्होंने उन्हें “मौन कथाकार” और बेहद विनम्र व्यक्तित्व बताया, जिनकी याद हमेशा बनी रहेगी।
इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल ने रघु राय को अपना मार्गदर्शक और करीबी मित्र बताया। उन्होंने कहा कि दिल्ली को देखने और समझने का नजरिया उन्हें रघु राय से ही मिला। उनके अनुसार राय न केवल महान फोटोग्राफर थे बल्कि बेहद उदार और स्नेही इंसान भी थे।
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने कहा कि रघु राय की नजर ने भारत के संघर्ष और उपलब्धियों को जीवंतता और स्पष्टता के साथ अमर कर दिया। उन्होंने उनके योगदान को लंबे समय तक याद किए जाने वाला बताया।