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बैडमिंटन में ऐतिहासिक बदलाव, 21 प्वाइंट सिस्टम खत्म, अब 15 प्वाइंट के तीन गेम में होंगे मुकाबले

BWF की आम बैठक में बड़ा फैसला, 198 देशों के समर्थन से पास हुआ नया प्वाइंट सिस्टम, 2027 से लागू।

By रजनीश प्रसाद

Apr 27, 2026 12:03 IST

कोपेनहैगन : डेनमार्क के हॉर्सेंस में आयोजित बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) की वार्षिक आम बैठक में खेल के प्वाइंट सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया गया है। अब तक बैडमिंटन मैच तीन गेमों में 21 प्वाइंट तक खेले जाते थे लेकिन नए नियम के तहत हर गेम 15 प्वाइंट का होगा। यह नया नियम 4 जनवरी 2027 से सभी टूर्नामेंट में लागू किया जाएगा।

इस बदलाव को लेकर मतदान हुआ जिसमें 198 देशों ने 15 प्वाइंट के पक्ष में वोट दिया जबकि केवल 43 देशों ने पुराने 21 प्वाइंट सिस्टम को बनाए रखने का समर्थन किया।

बदलाव की वजह क्या है?

विश्व बैडमिंटन संघ का मानना है कि इस बदलाव से खेल अधिक रोमांचक बनेगा और खिलाड़ियों पर शारीरिक दबाव कम होगा। अभी 21 प्वाइंट के मैच अक्सर डेढ़ घंटे तक चलते हैं जिससे दर्शकों की रुचि कम हो जाती है और टीवी प्रसारण में भी दिक्कत आती है। वहीं 15 प्वाइंट का मैच एक घंटे के भीतर खत्म होने की संभावना है। इससे खिलाड़ियों की थकान कम होगी खेल में तेज़ी आएगी और दर्शकों के लिए उत्साह बना रहेगा। साथ ही कम समय में मैच खत्म होने से प्रसारण के दौरान विज्ञापन प्रबंधन भी बेहतर होगा जिससे टीवी चैनलों की रुचि बढ़ेगी।

भारतीय खेमे में मिली-जुली प्रतिक्रिया

भारत के राष्ट्रीय कोच विमल कुमार ने इस फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि 21 प्वाइंट के खेल में जो रोमांच और संतुलन होता है वह 15 प्वाइंट में नहीं रहेगा। उनके अनुसार अगर कोई खिलाड़ी पीछे रह जाए तो उसके पास वापसी का पर्याप्त मौका नहीं होगा जिससे मानसिक दबाव बढ़ेगा।

भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि खेल के विकास के लिए समय-समय पर बदलाव जरूरी होते हैं और यह कदम दर्शकों, प्रसारकों और व्यावसायिक साझेदारों के हित में उठाया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि हर बदलाव सुधार नहीं लाता और इसे अपनाना खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने भी इस बदलाव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2006 से लागू 21 प्वाइंट सिस्टम ने बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और इसमें बदलाव से खेल को नुकसान हो सकता है।

भारत के डबल्स खिलाड़ी सात्विक साईराज ने इस बदलाव की तुलना क्रिकेट से की। उनके अनुसार यह बदलाव टेस्ट क्रिकेट और टी-20 के अंतर जैसा है। टेस्ट क्रिकेट की अपनी खासियत है लेकिन आज की पीढ़ी छोटे फॉर्मेट को ज्यादा पसंद करती है। उन्होंने कहा कि इस नए सिस्टम के अनुसार खिलाड़ियों को अपनी रणनीति में बड़े बदलाव करने होंगे।

कुल मिलाकर, बैडमिंटन के इस नए अध्याय को लेकर दुनिया भर में चर्चा तेज है। अब देखना होगा कि यह बदलाव खेल को कितना नया रूप देता है।

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