नई दिल्ली: नीति आयोग (NITI Aayog) ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) 2.0 के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पेश करते हुए कहा है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में राज्यों की भूमिका सबसे अहम होगी।
रिपोर्ट के अनुसार, DPI 2.0 को विकेंद्रीकृत मॉडल के तहत लागू किया जाएगा, जहां राज्य और जिले विकास के मुख्य केंद्र होंगे, जबकि केंद्र सरकार और नीति आयोग केवल मार्गदर्शक और सहयोगी की भूमिका निभाएंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत की मौजूदा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पहलें पहले ही GDP में लगभग 1 प्रतिशत का योगदान दे रही हैं। अनुमान है कि यह योगदान 2030 तक बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।
इसी कारण DPI 2.0 को तेज गति से लागू करने पर जोर दिया गया है ताकि इसका आर्थिक प्रभाव और बढ़ाया जा सके।
राज्य-आधारित विकास मॉडल होगा आधार
नीति आयोग ने कहा कि भारत की विविधता को देखते हुए एक ही केंद्रीय मॉडल प्रभावी नहीं हो सकता। इसलिए DPI 2.0 का आधार “स्टेट-लेड एक्जीक्यूशन” होगा।
इस मॉडल में राज्यों और जिलों को आत्मनिर्भर स्थानीय अर्थव्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी दी जाएगी, जबकि केंद्र सरकार वित्तीय सहायता, समन्वय और नीति समर्थन प्रदान करेगी।
दो साल का चक्र: पायलट से स्केल तक
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सेक्टर-आधारित बदलाव दो साल के चक्र में किए जाएं।
पहले वर्ष में चुनिंदा राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट चलेंगे, और दूसरे वर्ष में सफल मॉडलों को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा। इससे पूरे देश में तेजी से दोहराए जा सकने वाले समाधान विकसित होंगे। 2026-27 के पहले चक्र में विशेष रूप से Micro Small and Medium Enterprises और कृषि क्षेत्र पर ध्यान दिया जाएगा। इन दोनों क्षेत्रों को इसलिए चुना गया है क्योंकि इनमें बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाने की क्षमता है। योजना के तहत छह “चैंपियन राज्य या केंद्र शासित प्रदेश” चुने जाएंगे। प्रत्येक राज्य में एक या दो जिलों को पायलट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके बाद सफल मॉडलों को कम से कम पांच या उससे अधिक राज्यों में विस्तार दिया जाएगा।
मजबूत संस्थागत ढांचे की तैयारी
कार्यान्वयन के लिए Ministry of Electronics and Information Technology और नीति आयोग के नेतृत्व में एक समन्वय तंत्र बनाने का प्रस्ताव है। इसमें विशेषज्ञ समूह, कोऑर्डिनेशन टीम और वैश्विक डीपीआई संस्थाओं की भागीदारी शामिल होगी। साथ ही राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए एक इम्पैक्ट अवॉर्ड सिस्टम भी प्रस्तावित है। रिपोर्ट में 2027 तक एक स्वतंत्र वैश्विक इकोसिस्टम संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जो DPI और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाएगी। यह संस्था भारत के सफल डिजिटल मॉडलों को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने का काम करेगी।
डिजिटल से आर्थिक परिवर्तन का लक्ष्य
नीति आयोग ने स्पष्ट किया है कि DPI 2.0 का उद्देश्य केवल डिजिटल पहुंच नहीं, बल्कि इसे उत्पादकता आधारित आर्थिक विकास में बदलना है। “विकसित भारत 2047” का लक्ष्य तभी संभव होगा जब डिजिटल समावेशन सीधे रोजगार और आर्थिक अवसरों से जुड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, भारत को तेजी, समन्वय और राज्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ आगे बढ़ना होगा ताकि DPI 2.0 एक ऐसा मॉडल बन सके जो न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करे बल्कि वैश्विक डिजिटल विकास का भी उदाहरण बने।