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ईरान संकट पर ट्रंप-पुतिन में लंबी बातचीत, हॉर्मुज़ नाकेबंदी बनी बड़ा मुद्दा

पुतिन की ट्रंप को चेतावनी: ईरान पर नए सैन्य हमले के होंगे गंभीर परिणाम

वॉशिंगटन : फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर नए हमले का कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया है लेकिन उन्होंने कहा है कि नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इससे पहले अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान उनके शर्तों के अनुसार समझौता नहीं करता तो फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप को आगाह किया है कि ईरान के खिलाफ कोई भी नया सैन्य कदम गंभीर और हानिकारक परिणाम ला सकता है। क्रेमलिन (Kremlin) के अनुसार बुधवार को लगभग डेढ़ घंटे चली फोन बातचीत के दौरान पश्चिम एशिया के युद्ध पर दोनों नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा हुई जिसमें यह चेतावनी भी शामिल थी।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव अभी भी जारी है। ईरान ने नाकेबंदी हटाने की शर्त पर इसे खोलने का प्रस्ताव दिया था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि नाकेबंदी बमबारी की तुलना में अधिक प्रभावी कदम है और इससे ईरान पर दबाव और बढ़ेगा। हालांकि उन्होंने किसी संभावित सैन्य योजना पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका को यह भी चेतावनी दी है कि ईरान में नए सैन्य कदम न केवल ईरान और उसके पड़ोसी देशों के लिए बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर परिणाम ला सकते हैं।

इसी बातचीत में रूस के राष्ट्रपति ने ईरान संघर्ष में युद्धविराम अवधि बढ़ाने के अमेरिकी निर्णय की सराहना भी की। उनका कहना है कि इससे दोनों देशों के बीच समझौते और स्थिति को सामान्य करने में मदद मिल सकती है।

व्लादिमीर पुतिन ने इस संघर्ष को खत्म करने के लिए कुछ कूटनीतिक प्रस्ताव भी दिए हैं और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

गौरतलब है कि भले ही फिलहाल ईरान पर नया हमला नहीं हुआ है, लेकिन अमेरिका की ओर से सैन्य तैनाती बढ़ाई जा रही है। ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान उनकी बात नहीं मानता तो गंभीर हमले हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि ईरान किसी भी तरह का परमाणु कार्यक्रम नहीं रख सकता। हालांकि दोनों पक्षों के सख्त रुख के कारण शांति वार्ता की दूसरी कोशिश भी विफल हो गई है।

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