नयी दिल्लीः कमर्शियल रसोई गैस की कीमतों में एक बार फिर तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों पर सीधा आर्थिक असर पड़ा है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹994 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद कोलकाता में इसकी नई दर ₹3,202 हो गई है, जो गुरुवार मध्यरात्रि से लागू हो चुकी है।
देश के अन्य बड़े शहरों में भी कीमतें बढ़ी हैं। दिल्ली में यह सिलेंडर अब लगभग ₹3,071.50 में मिल रहा है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत ₹3,024 के करीब पहुंच गई है। चेन्नई में भी दरें और अधिक बताई जा रही हैं। इस अचानक बढ़ोतरी ने कारोबार जगत में चिंता बढ़ा दी है।
लगातार बढ़ोतरी का लंबा सिलसिला
पिछले कुछ महीनों से कमर्शियल LPG की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। 6 मार्च 2026 को ₹114.50 की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद 31 मार्च को ₹218 का इजाफा दर्ज किया गया। अप्रैल 2026 में भी कई चरणों में लगभग ₹195 से ₹218 तक की बढ़ोतरी हुई।
अब एक बार फिर ₹994 की बड़ी छलांग ने हालात को और गंभीर बना दिया है। लगातार हो रही इन बढ़ोतरी से यह साफ है कि कमर्शियल गैस की कीमतों पर दबाव लगातार बना हुआ है और इसका असर सीधे कारोबार की लागत पर पड़ रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन वैश्विक दबाव बरकरार
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की स्थिति बनी हुई है। 14.2 किलोग्राम घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कोलकाता में यह ₹939, दिल्ली में ₹913 और मुंबई में ₹912.50 पर स्थिर है। सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी देती है, जबकि कमर्शियल सेक्टर को बाजार दर पर ही गैस खरीदनी पड़ती है।
इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारण प्रमुख माने जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान से जुड़े संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय LPG बाजार पर दबाव बढ़ा है। भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें लगभग 80 से 90 प्रतिशत सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होकर आती है। इसी वजह से वैश्विक उतार-चढ़ाव का असर सीधे घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है।
होटल कारोबार पर असर और आगे की स्थिति
लगातार बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट कारोबार पर पड़ रहा है। पहले से ही बढ़ती लागत से जूझ रहे छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह नई बढ़ोतरी और बड़ी चुनौती बन गई है। कई कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो उन्हें खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
तेल कंपनियां हर महीने की शुरुआत में कीमतों की समीक्षा करती हैं, इसलिए आने वाले समय में भी बदलाव की संभावना बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवसायों को ऊर्जा बचत के उपाय अपनाने चाहिए और जहां संभव हो वहां PNG जैसे विकल्पों की ओर रुख करना चाहिए। कुल मिलाकर यह स्थिति महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती है।