नई दिल्ली : यह शिखर सम्मेलन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रस्तुत करने का एक प्रमुख मंच है। इसका उद्देश्य देशभर में समावेशी, सुलभ और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाना है जैसा कि जारी बयान में बताया गया है। सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगात प्रकाश नड्डा ने हरियाणा सरकार का आभार व्यक्त किया और राज्य की स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों के लिए प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह शिखर सम्मेलन इस बात का उदाहरण है कि जमीनी स्तर पर अपनाई गई व्यावहारिक रणनीतियाँ एक प्रभावी और उत्तरदायी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का निर्माण कर सकती हैं।
उन्होंने कहा यह सम्मेलन एक ऐसा मंच है जहाँ हम रणनीतियाँ, नवाचार और प्रक्रियागत सुधार साझा करते हैं। यह दिखाता है कि कैसे प्रक्रियात्मक रणनीतियाँ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए एक प्रभावी स्वास्थ्य प्रणाली और पारिस्थितिकी तंत्र बना सकती हैं। इस अवसर पर शुरू की गई पहलों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों के कार्य वातावरण को आसान बनाना और सेवा वितरण तथा स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करना है। उनका जोर एकीकृत, कुशल और उत्तरदायी स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने पर रहा।
भारत में पिछले दशक में स्वास्थ्य क्षेत्र में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए जगात प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि पहले की स्वास्थ्य नीति मुख्यतः उपचारात्मक दृष्टिकोण पर आधारित थी जबकि 2027 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने रोकथाम, संवर्धन, उपचार और उपशामक देखभाल को शामिल कर एक समग्र और जन-केंद्रित व्यवस्था स्थापित की। उन्होंने कहा पिछले दशक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने सभी क्षेत्रों विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
उन्होंने बताया कि 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब लगभग 1.5 अरब लोगों के लिए पहली संपर्क इकाई के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन केंद्रों ने उच्च रक्तचाप, मधुमेह और कैंसर (मुंह, स्तन और गर्भाशय ग्रीवा) जैसी गैर-संचारी बीमारियों की व्यापक स्क्रीनिंग के माध्यम से निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। गुणवत्ता सुधार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि 50,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के तहत प्रमाणित हो चुके है लेकिन गुणवत्ता प्रमाणन को और बढ़ाने तथा नियमित ऑडिट को मजबूत करने की आवश्यकता है।
उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। संस्थागत प्रसव दर 79 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है। मातृ मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हालिया वैश्विक अनुमानों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 73 प्रतिशत की कमी आई है।
मलेरिया और टीबी नियंत्रण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की लगभग एक-छठी आबादी होने के बावजूद वैश्विक मलेरिया बोझ में केवल एक छोटे हिस्से का योगदान देता है। टीबी की घटनाओं में भी वैश्विक औसत की तुलना में तेज गिरावट आई है और उपचार कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों जैसे सीएमओ और सीएचओ को एनएचएम प्रावधानों की अधिक जानकारी होना जरूरी है। साथ ही समय पर धन के उपयोग बेहतर समन्वय और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता है।
अंत में जगात प्रकाश नड्डा ने कहा कि वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन उनका प्रभावी और समय पर उपयोग ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सुशासन बेहतर संचार और अंतिम स्तर तक कार्यान्वयन ही एक मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में निर्णायक साबित होंगे।