कोलकाताः आमतौर पर बंगाल में पसीने, तपिश और चिपचिपी हवा का मौसम रहता है। हालांकि, इस बार पश्चिम बंगाल में आसमान ने जैसे अपनी स्क्रिप्ट बदल दी। बुधवार की रात, जब लोग गर्मी से राहत की उम्मीद भी नहीं कर रहे थे, तभी अचानक बादलों की एक लंबी, घनी और आक्रामक कतार ने पूरे इलाके को घेर लिया।
करीब 900 किलोमीटर तक फैली यह ‘स्क्वॉल लाइन’ कोई सामान्य बादल नहीं थी, बल्कि गरज, बिजली और तेज हवाओं से भरी एक चलती-फिरती मौसमीय दीवार थी। यह नेपाल से उठी, बिहार और उत्तर बंगाल को पार करती हुई दक्षिण बंगाल और फिर ओडिशा तक फैल गई-जैसे एक ही धागे में पिरोया गया तूफान।
बारिश का ऐसा फैलाव, जो कम ही दिखता है
रात साढ़े आठ बजे के बाद शुरू हुई बारिश ने कुछ ही घंटों में कई इलाकों को पानी-पानी कर दिया।
कोलकाता के अलीपुर में 54.2 मिमी बारिश दर्ज हुई-अप्रैल के लिहाज से यह एक असाधारण आंकड़ा है। हावड़ा के आमता में तो बारिश ने ‘सेंचुरी’ के करीब पहुंचते हुए 97.1 मिमी को छू लिया।
कलाइकुंडा (75.7 मिमी) और सॉल्टलेक (62.8 मिमी) भी पीछे नहीं रहे। वहीं उत्तर बंगाल में मयनागुड़ी, बड़दिघी और माथाभांगा जैसे इलाकों में भी 60 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के मुताबिक, अप्रैल के आखिरी दिनों में इतने बड़े क्षेत्र में एक साथ इतनी बारिश होना बेहद दुर्लभ है।
कुछ घंटों में बदल गया मौसम का मिजाज
इस बारिश की खास बात सिर्फ पानी नहीं थी-बल्कि उसका असर था। जहां कुछ घंटे पहले तक तापमान 32C के आसपास था, वहीं बारिश और तेज हवाओं के बाद यह गिरकर करीब 22C तक पहुंच गया। यानी महज कुछ घंटों में 8–10 डिग्री की गिरावट।
न्यूनतम तापमान भी 20.4C तक आ गया, जो पिछले दिन से करीब 7 डिग्री कम था। गर्मी से बेहाल लोगों को राहत जरूर मिली, लेकिन 50–70 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने कई जगहों पर परेशानी भी खड़ी की।
‘स्क्वॉल लाइन’: एक चलता-फिरता तूफान
अगर इसे आसान भाषा में समझें, तो ‘स्क्वॉल लाइन’ बादलों की एक ऐसी सीधी कतार है, जो खुद में एक तूफानी सिस्टम होती है।
जब जमीन के पास की गर्म और नमी भरी हवा तेजी से ऊपर उठती है और ऊपर की ठंडी हवा से टकराती है, तब विशाल क्यूम्युलोनिंबस बादल बनते हैं। ये बादल एक लाइन में जुड़ जाते हैं और फिर शुरू होता है तेज बारिश, बिजली और आंधी का सिलसिला।
इस दौरान ठंडी हवा नीचे गिरती है और सामने की गर्म हवा को ऊपर उठाती है-यानी यह सिस्टम खुद को आगे बढ़ाता रहता है। यही वजह है कि यह सैकड़ों किलोमीटर तक असर डाल सकता है।
आगे का संकेत: क्या ये नया ट्रेंड है?
मौसम विभाग का अनुमान है कि 30 अप्रैल से 4 मई के बीच पूर्वी भारत के कई हिस्सों-खासतौर पर गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा-में फिर से ऐसी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं अब अपवाद नहीं रहीं। जलवायु परिवर्तन के असर से मौसम ज्यादा अनिश्चित और चरम होता जा रहा है-जहां गर्मी के बीच अचानक ऐसी तेज बारिश आम होती जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक बारिश नहीं, बल्कि बदलते मौसम के संकेत की कहानी है। अप्रैल में मानसून जैसा व्यवहार बताता है कि आने वाले समय में हमें मौसम के नए और अप्रत्याशित रूप के लिए तैयार रहना होगा।