नई दिल्ली : केंद्र सरकार देश में विदेशी निवेश (FDI) बढ़ाने और महत्वपूर्ण उद्योगों में घरेलू क्षमता मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही एक नया फ्रेमवर्क लागू करेगी जिसके तहत कुछ विशेष क्षेत्रों में विदेशी निवेश प्रस्तावों को तय समयसीमा के भीतर मंजूरी दी जाएगी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार सात अहम सेक्टरों को इस योजना में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों को 60 दिनों के भीतर मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है। माना जा रहा है कि इससे लंबे समय से लंबित करीब 600 निवेश प्रस्तावों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमित चीनी (चाइना) हिस्सेदारी वाली विदेशी कंपनियों को भी कुछ शर्तों के साथ इस व्यवस्था का लाभ मिल सकता है। इससे पहले 2020 के प्रेस नोट-3 के तहत भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों के निवेश पर सख्त नियम लागू थे लेकिन मार्च 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन नियमों में आंशिक ढील देने का फैसला किया।
नए नियम के अनुसार यदि किसी विदेशी कंपनी में ऐसे देशों की हिस्सेदारी अधिकतम 10 प्रतिशत तक ह तो कुछ मामलों में उसे ‘ऑटोमेटिक रूट’ के जरिए निवेश की अनुमति मिल सकती है।
सरकार ने जिन सात क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है, उनमें रेअर अर्थ मैग्नेट, रेअर अर्थ प्रोसेसिंग, पॉलिसिलिकॉन और इंगट-वेफर, एडवांस्ड बैटरी कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स शामिल हैं। जरूरत के अनुसार भविष्य में और सेक्टर भी जोड़े जा सकते हैं।
हालांकि सरकार ने साफ किया है कि सभी निवेश प्रस्तावों के लिए राजनीतिक और सुरक्षा से जुड़ी मंजूरी अनिवार्य रहेगी। साथ ही चीन, हांगकांग या भारत के साथ स्थलीय सीमा साझा करने वाले देशों में पंजीकृत कंपनियों पर ‘ऑटोमेटिक रूट’ लागू नहीं होगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस नई नीति से देश में निवेश बढ़ेगा और वित्त वर्ष 2025-26 में कुल एफडीआई 90 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसके साथ ही महत्वपूर्ण तकनीक और विनिर्माण क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता भी और मजबूत होगी।