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ओलंपिक में खेलने के लक्ष्य से कनाडा छोड़कर देश वापस लौटे भारतीय मूल के तीरंदाज देवांग गुप्ता

राहुल बनर्जी की कोलकाता आर्चरी अकादमी में कर रहे प्रशिक्षण, एशियन गेम्स ट्रायल पर नजर।

कोलकाता : ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन की तरह ही अब भारतीय खेलों में भी विदेश में खेल रहे भारतीय मूल के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को देश की जर्सी पहनाने की कोशिशें तेज हो रही हैं। कुछ महीने पहले इसी प्रयास के तहत ऑस्ट्रेलिया के रयान विलियम्स ने भारतीय टीम से जुड़कर एक नया उदाहरण पेश किया था।

इसी तरह कनाडा का सफर खत्म कर तीरंदाज देवांग गुप्ता भी भारत की जर्सी में पहले ही खेल चुके हैं। देश को एक बेहतरीन तीरंदाज देने के पीछे एक बंगाल के खिलाड़ी का बड़ा योगदान है। कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता और पूर्व ओलंपियन राहुल बनर्जी के प्रयासों से देवांग की वर्तमान ट्रेनिंग लोकेशन कोलकाता बनी है। उल्टाडांगा स्थित कोलकाता पुलिस की पांचवीं बटालियन के मैदान में स्थित दोला एंड राहुल बनर्जी आर्चरी अकादमी में देवांग कई महीनों से अभ्यास कर रहे हैं। इसी दौरान उन्होंने बैंकॉक एशिया कप में रिकार्व टीम इवेंट में भारत के लिए रजत पदक भी जीता है। फिलहाल वे रिकार्व वर्ग में देश के छठे नंबर के तीरंदाज हैं।

राष्ट्रीय कोच राहुल बनर्जी के अनुसार देवांग जिस तेजी से सुधार कर रहे हैं उससे मुझे पूरा विश्वास है कि वे एशियन गेम्स ट्रायल में उतरकर शीर्ष तीन में जगह बना लेंगे और भारत के लिए खेलने का अवसर प्राप्त करेंगे। कुछ दिनों में देवांग सोनीपत में होने वाले गेम्स ट्रायल में भाग लेने जाएंगे। उनके साथ ट्रायल में राहुल की अकादमी के ही एक अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ी जुएल सरकार को भी मौका मिला है जो एशिया कप की रजत पदक विजेता टीम में देवांग के साथी रहे हैं।

गुरुवार दोपहर अकादमी के जिमनैजियम में अभ्यास के दौरान लगभग पच्चीस वर्षीय देवांग ने कहा की मेरा लक्ष्य 2028 ओलंपिक में भारत के लिए पदक जीतना है और इसके लिए मैं इस वर्ष एशियन गेम्स की टीम में जगह बनाना चाहता हूं।

उन्होंने आगे बताया की राहुल सर की यह अकादमी इतनी बेहतर और पूरी तरह सुविधायुक्त है कि यहां मैं रोज सात घंटे अभ्यास करके खुद को तेजी से तैयार कर पा रहा हूं। यह सुविधा मुझे कनाडा में नहीं मिली।

कोच राहुल बनर्जी ने भी भरोसा जताते हुए कहा की राष्ट्रीय टीम में शीर्ष तीन में रहने के लिए जिस स्कोर की जरूरत होती है वह देवांग यहां लगातार हासिल कर रहे हैं। मुझे उन पर पूरा विश्वास है।

करीब पंद्रह साल पहले आजीविका के लिए पंजाब के संगरूर से गुप्ता परिवार कनाडा चला गया था। तब देवांग की उम्र 9-10 साल थी। इसके बाद उनका बचपन और शिक्षा कनाडा के ओंटारियो में हुई। वे फाइनेंस एनालिस्ट के रूप में काम भी करने लगे थे साथ ही तीरंदाजी का अभ्यास जारी रखा। पिछले साल ग्रेट शिकागो ओपन आर्चरी में उन्होंने सभी को चौंकाते हुए रिकार्व व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। तभी से उनके ओलंपिक पदक जीतने का सपना और मजबूत हुआ और इसी सपने को पूरा करने के लिए वे राहुल बनर्जी के मार्गदर्शन में भारत लौट आए।

दोला बनर्जी, राहुल बनर्जी, अतनु दास और दीपिका कुमारी जैसे नामों के बाद अब बंगाल एक और ओलंपियन की उम्मीद देवांग गुप्ता में देख सकता है।

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