इस्लामाबाद : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेज़ बढ़ोतरी हो रही है। इस वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा प्रबंधन क्षमता की सराहना स्वयं पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री परवेज अली मलिक ने की है। उन्होंने एक साक्षात्कार में स्वीकार किया कि भारत ने रणनीतिक भंडार और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार के कारण इस संकट को बेहतर तरीके से संभाला है।
परवेज अली मलिक ने कहा कि भारत के पास लगभग 600 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है और साथ ही बड़ा रणनीतिक तेल भंडार भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि जब-जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ी हैं तब भारत ने पेट्रोल और डीजल पर कर घटाकर आम जनता को राहत देने की कोशिश की है। उनके अनुसार ऐसा करने के लिए मजबूत आर्थिक आधार की आवश्यकता होती है, जो भारत के पास उपलब्ध है।
दूसरी ओर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर उन्होंने बताया कि जैसे ही तेल की कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची वहां लॉकडाउन लागू करना पड़ा। इसके साथ ही उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन पर 200 प्रतिशत तक कर लगाया गया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास केवल 5 से 7 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है जबकि परिष्कृत ईंधन का स्टॉक 20 से 21 दिनों तक ही चल सकता है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान के पास कोई ठोस रणनीतिक तेल भंडार नहीं है।
पाकिस्तानी मंत्री ने इसके लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की नीतियों को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को IMF के कार्यक्रमों का पालन करना पड़ता है, जबकि भारत इस प्रकार की बाध्यता से मुक्त है। उन्होंने बताया कि कीमतों में बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान ने IMF के साथ बैठक की और कुछ कदम उठाए जैसे डीजल पर कर में कमी लेकिन पेट्रोल की कीमतों में बड़ी राहत देना संभव नहीं हो पाया।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले तीन वर्षों में वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए करों में कमी जैसी नीतियां अपनाईं जिससे कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर नहीं गईं। इसके विपरीत पाकिस्तान में ईंधन संकट के कारण गंभीर बिजली संकट उत्पन्न हो गया है जहां नियमित रूप से लोडशेडिंग हो रही है और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बांग्लादेश की स्थिति भी इससे अलग नहीं बताई जा रही है। वहां कई पेट्रोल पंप बंद कर दिए गए हैं और युद्ध के बाद कई शैक्षणिक संस्थानों को दो सप्ताह के लिए बंद करना पड़ा था। पाकिस्तान में सरकारी कार्यालय सप्ताह में केवल चार दिन काम कर रहे है जबकि निजी संस्थानों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों को घर से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस पूरे परिदृश्य में भारत की आर्थिक मजबूती और बुनियादी ढांचे को लेकर पाकिस्तानी मंत्री की यह खुली स्वीकारोक्ति कई विशेषज्ञों के अनुसार काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह क्षेत्रीय तुलना के संदर्भ में भारत की स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।