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एक नजर ने बदली जिंदगी: जब गौशाला बनी क्लासरूम और शुरू हुई बदलाव की कहानी

21 साल की उम्र में लिया एक फैसला, आज ‘पारिजात अकादमी’ के जरिए 20 गांवों के बच्चों के भविष्य को साकार कर रहा।

गुवाहाटीः असम के एक साधारण से गांव में शुरू हुई यह कहानी आज प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी है। यह कहानी है उत्तम तेरन की, जिन्होंने अपने आसपास की एक छोटी-सी घटना को बड़े बदलाव में बदल दिया।

एक दिन उन्होंने देखा कि कुछ बच्चे स्कूल जाने के बजाय कीचड़ में खेल रहे हैं। यह दृश्य उनके मन में गहराई से उतर गया। उस वक्त उनकी उम्र महज 21 साल थी, लेकिन उन्होंने समझ लिया कि शिक्षा के अभाव में ये बच्चे अपने भविष्य से दूर हो रहे हैं। उसी क्षण उन्होंने फैसला लिया कि वे इन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाएंगे।

शुरुआत बेहद साधारण थी-अपने ही घर की गौशाला में उन्होंने मुफ्त ट्यूशन क्लास शुरू कर दी। बिना संसाधनों के शुरू हुई यह पहल धीरे-धीरे आकार लेने लगी। तीन साल बाद, 2003 में बीएससी पास करने के बाद उत्तम ने इसे औपचारिक रूप दिया और ‘पारिजात अकादमी’ की स्थापना की।

समय के साथ इस नॉन-प्रॉफिट स्कूल की पहचान बढ़ती गई। आज यह संस्थान 20 गांवों के करीब 400 बच्चों को शिक्षा दे रहा है। यहां 22 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं। स्कूल को उत्तम ने अपने घर के एक हिस्से में ही विकसित किया है, जिसे असम बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। यहां नर्सरी से लेकर कक्षा 10 तक पढ़ाई होती है।

दूर-दराज से आने वाले बच्चों के लिए हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध है। स्कूल में असमिया, हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान और गणित जैसे विषय पढ़ाए जाते हैं। इसके साथ ही कंप्यूटर की व्यावहारिक शिक्षा भी दी जाती है, ताकि बच्चे तकनीकी रूप से भी सक्षम बन सकें।

इस संस्थान की खास बात यह है कि यहां शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा गया है। बच्चों को सिलाई, हस्तकला, खेलकूद और नृत्य जैसी गतिविधियों में भी प्रशिक्षित किया जाता है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास हो सके।

स्कूल के संचालन में समाज का भी महत्वपूर्ण योगदान है। कई लोग आर्थिक सहायता करते हैं, तो कुछ जरूरी सामान दान करते हैं। पुराने बैग, किताबें और कॉपियां इकट्ठा की जाती हैं। हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था हेतु चावल और सब्जियां भी दान में ली जाती हैं।

उत्तम तेरन का मानना है कि शिक्षा ही वह ताकत है, जो समाज के वंचित वर्ग को आगे बढ़ा सकती है। उनका कहना है कि अगर हर बच्चे को पढ़ने का मौका मिले, तो वह अपने जीवन को बेहतर दिशा दे सकता है।

यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि एक सोच की है-जहां एक व्यक्ति का संकल्प सैकड़ों बच्चों के भविष्य को रोशन कर रहा है।

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