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जंगलों की दहाड़: 800 किमी भटककर सिमलीपाल पहुंचा बाघ, बना दुर्लभ रिकॉर्ड

कैमरा ट्रैप में कैद ऐतिहासिक मूवमेंट, छत्तीसगढ़ से ओडिशा तक फैला लंबा वन्यजीव सफर

By श्वेता सिंह

Apr 28, 2026 23:11 IST

मयूरभंजः ओडिशा के सिमलीपाल टाइगर रिजर्व (Similipal Tiger Reserve) में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक असाधारण घटना दर्ज हुई है। यहां लगभग 800 किलोमीटर लंबी यात्रा तय कर एक युवा नर रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है।

यह बाघ हाल ही में लगाए गए कैमरा ट्रैप्स में कैद हुआ, जो देशभर में चल रही बाघ गणना प्रक्रिया का हिस्सा हैं। अधिकारियों ने इसे एक दुर्लभ और ऐतिहासिक वन्यजीव मूवमेंट बताया है।

सिमलीपाल टाइगर रिजर्व (Similipal Tiger Reserve) के फील्ड डायरेक्टर प्रकाश चंद्र गोघिनेनी के अनुसार, यह बाघ दिसंबर–जनवरी के बीच रिजर्व में पहुंचा था। माना जा रहा है कि इसकी यात्रा की शुरुआत छत्तीसगढ़ क्षेत्र से हुई, जिसके बाद यह कई राज्यों और जंगलों से होकर गुजरा।

अपने लंबे सफर के दौरान इस बाघ ने सुंदरगढ़, बनई वन क्षेत्र, देवगढ़, ढेंकानाल और कामाख्यानगर जैसे इलाकों को पार किया और अंततः सिमलीपाल पहुंचा। यह पूरी यात्रा कैमरा ट्रैप और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से रिकॉर्ड की गई, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है।

अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब किसी बाहरी राज्य से इतना लंबा सफर तय कर कोई बाघ प्राकृतिक रूप से सिमलीपाल तक पहुंचा है। अनुमान है कि यह बाघ मध्य भारत के किसी बड़े वन क्षेत्र से यहां आया है।

फिलहाल यह बाघ अभी भी रिजर्व में मौजूद है और उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले समय में लगाए जाने वाले नए कैमरा ट्रैप्स से उसके स्वास्थ्य और व्यवहार को लेकर और जानकारी मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लंबी दूरी की यात्रा बाघों की प्राकृतिक प्रवृत्ति को दर्शाती है, जिसमें वे नए क्षेत्र, बेहतर शिकार और उपयुक्त आवास की तलाश में दूर-दूर तक चले जाते हैं।

सिमलीपाल टाइगर रिजर्व (Similipal Tiger Reserve) पहले से ही अपने दुर्लभ मेलानिस्टिक (काले) बाघों और समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। हालांकि इसकी भौगोलिक अलगाव के कारण यहां इनब्रीडिंग की चिंता रही है। ऐसे में बाहरी बाघ का आगमन जेनेटिक विविधता के लिए एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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