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आतंक की छाया से उभरता पहलगाम: एक साल बाद फिर लौटी रौनक

सख्त सुरक्षा, लौटते सैलानी और नई उम्मीदों के साथ ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ में फिर दिखी जिंदगी की हलचल।

By श्वेता सिंह

Apr 17, 2026 19:08 IST

अनंतनागः पहलगाम की वादियों में इस समय जो हलचल दिखाई देती है, वह सिर्फ पर्यटन की वापसी नहीं है-यह एक जख्म के धीरे-धीरे भरने की कहानी है। एक साल पहले बैसरन के शांत मैदानों में गोलियों की आवाज गूंजी थी, जिसने 26 जिंदगियों को हमेशा के लिए खामोश कर दिया। उस दिन के बाद घाटी में सिर्फ सन्नाटा नहीं छाया, बल्कि लोगों के मन में डर भी गहराई तक उतर गया था।

आज वही पहलगाम फिर से लोगों का स्वागत कर रहा है, लेकिन इस बार सिर्फ अपनी खूबसूरती से नहीं, बल्कि अपने साहस से भी।

घाटी में लौटते पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं आ रहे, वे एक बदली हुई कहानी के साक्षी बन रहे हैं। सड़कों पर बढ़ी सुरक्षा, हर कुछ दूरी पर तैनात जवान और लगातार निगरानी-ये सब मिलकर एक भरोसा पैदा कर रहे हैं कि हालात अब पहले जैसे नहीं रहे।

यह बदलाव अचानक नहीं आया। हमले के बाद प्रशासन ने कई पर्यटन स्थलों को बंद किया, सुरक्षा की व्यापक समीक्षा की और फिर धीरे-धीरे उन्हें दोबारा खोला। इस सतर्कता ने ही लोगों के मन में भरोसा लौटाया है।

दिलचस्प बात यह है कि यहां आने वाले कई पर्यटक उन राज्यों से हैं, जिन्होंने खुद भी हिंसा और अस्थिरता के दौर देखे हैं। ऐसे लोग यहां की सुरक्षा व्यवस्था को समझते भी हैं और सराहते भी। उनके लिए यह सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक अनुभव है-जहां डर के बावजूद जिंदगी आगे बढ़ती है।

घाटी के स्थानीय लोगों के लिए भी यह वापसी बेहद मायने रखती है। पर्यटन उनकी आजीविका का बड़ा जरिया है। सैलानियों की बढ़ती संख्या उनके चेहरों पर फिर से मुस्कान ला रही है। दुकानें खुल रही हैं, घोड़े वाले फिर से सवारियों का इंतजार कर रहे हैं, और होटलों में रौनक लौट आई है।

हालांकि, सब कुछ सामान्य होने की बात कहना अभी जल्दबाजी होगी। उस हमले की यादें अब भी ताजा हैं और सुरक्षा बलों की मौजूदगी इसकी याद दिलाती रहती है। लेकिन फर्क इतना है कि अब इन यादों के साथ डर नहीं, बल्कि सतर्कता और भरोसा जुड़ गया है।

पर्यटन को फिर से गति देने में बेहतर कनेक्टिविटी, कड़ी सुरक्षा और सफल आयोजनों ने भी अहम भूमिका निभाई है। इन सबने मिलकर एक ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां लोग बिना झिझक कश्मीर आने का फैसला कर रहे हैं।

पहलगाम आज सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि यह एक संदेश है-कि मुश्किल हालात चाहे जितने भी गंभीर क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो वापसी संभव है। यहां की वादियां अब सिर्फ खूबसूरती की नहीं, बल्कि हिम्मत की भी पहचान बन चुकी हैं।

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