अंडमानः अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पर्यावरण और वन विभाग ने इतिहास रचते हुए अपने फ्रंटलाइन स्टाफ के लिए पहली बार पानी के नीचे प्रमाणपत्र वितरण समारोह आयोजित किया। यह कार्यक्रम शुक्रवार को आयोजित हुआ और इसे स्कूबा डाइविंग प्रशिक्षण के दौरान किया गया। मुख्य वन संरक्षक और प्रमुख वन्यजीव रक्षक, संजय कुमार सिन्हा, ने स्वयं पानी के भीतर जाकर प्रशिक्षुओं को उनके कोर्स पूरा करने के प्रमाणपत्र दिए। सिन्हा ने कहा कि यह पहल अनुभवात्मक प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक नया कदम है और समुद्री संरक्षण में प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और महत्व
यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय तटीय मिशन के जैवमंडल प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य फ्रंटलाइन स्टाफ की समुद्री निगरानी, कोरल रीफ की पहचान और निरीक्षण तकनीक सिखाना और समुद्री जैव विविधता संरक्षण को सुनिश्चित करना था।
प्रतिभागियों ने सीखी व्यावहारिक तकनीकें
इस गहन प्रशिक्षण में 14 कर्मचारियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने:
स्कूबा डाइविंग का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किया
पानी के भीतर नेविगेशन और रीफ स्वास्थ्य मूल्यांकन (रीफ हेल्थ असेसमेंट) सीखी
समुद्री जीव-जंतुओं का दस्तावेज़ीकरण किया और कोरल ब्लीचिंग जैसे खतरों तथा मानव-जनित दबावों को समझा
प्रतिभागियों ने सीधे अनुभव के जरिए सीखा कि कैसे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की जा सकती है।
प्रशासन की प्रतिबद्धता और समापन समारोह
कार्यक्रम का समापन समारोह सागर राष्ट्रीय उद्यान, वंडूर में आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ अधिकारी डॉ. एस. दिनेश कन्नन (मुख्य वन संरक्षक – वन्यजीव) और ए. अनिल कुमार (मुख्य वन संरक्षक – क्षेत्रीय) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
सिन्हा ने कहा कि इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से स्टाफ को पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना करने की क्षमता मिलती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह पहल विभाग की सतत समुद्री संसाधन प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।