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खुद टॉपर नहीं बन पाए, लेकिन सैकड़ों बच्चों को राह दिखा रहे रोहित

सब्जी बेचने से शुरू हुआ सफर, घर की छत पर खोला स्कूल। आज कई गांवों के बच्चों का सहारा।

By श्वेता सिंह

Mar 23, 2026 19:01 IST

पटनाः यह कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन यह हकीकत है बिहार के एक छोटे से गांव में रहने वाले रोहित कुमार की। पढ़ाई में कमजोर रहने और 10वीं तक भी पास न कर पाने वाले रोहित ने अपनी अधूरी शिक्षा को ही समाज के लिए एक मिशन बना लिया। आज वह करीब 1000 बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं।

रोहित का बचपन आर्थिक तंगी के बीच गुजरा। उनके परिवार की आय का मुख्य साधन दूध और गोबर बेचकर होने वाली कमाई थी। घर की जिम्मेदारियों को देखते हुए रोहित भी स्कूल के बाद सब्जी बेचने का काम करते थे। पढ़ाई में उनका मन कभी ज्यादा नहीं लगा और आखिरकार वह 10वीं की परीक्षा भी पास नहीं कर सके।

यहीं से उनकी सोच ने नया मोड़ लिया। खुद पढ़ाई में संघर्ष करने के बावजूद उन्होंने यह समझ लिया था कि शिक्षा के बिना जिंदगी आगे बढ़ाना बेहद कठिन है। जब आर्थिक दबाव और बढ़ा, तो उन्होंने पड़ोस के कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। शुरुआत में केवल चार बच्चे थे और फीस भी बहुत कम-करीब 125 रुपये प्रति माह।

धीरे-धीरे रोहित की मेहनत और उनके पढ़ाने के तरीके की चर्चा आसपास के इलाकों में फैलने लगी। बच्चों की संख्या बढ़ती गई और उनका छोटा सा ट्यूशन क्लास एक बड़े स्कूल का रूप लेने लगा। आज हालात यह हैं कि करीब 1000 बच्चे उनसे पढ़ रहे हैं। इनमें न सिर्फ उनके गांव, बल्कि आसपास के कई गांवों के छात्र भी शामिल हैं। खास बात यह है कि जिन बच्चों के परिवार फीस देने में सक्षम नहीं हैं, उन्हें रोहित मुफ्त में शिक्षा देते हैं।

शुरुआती दौर में लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जो खुद 10वीं पास नहीं कर पाया, वह दूसरों को क्या पढ़ाएगा। लेकिन रोहित ने इन बातों को अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। उनका मानना है कि शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि समझ और अनुभव भी उतने ही जरूरी हैं।

इसी सोच के साथ वह बच्चों को आसान भाषा में, उदाहरणों और लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए पढ़ाते हैं। उनका तरीका बच्चों को विषय को समझने और उससे जुड़ने में मदद करता है, जिससे पढ़ाई बोझ नहीं लगती।

रोहित का समर्पण उनके काम के समय से भी झलकता है। वह रोज सुबह 5 बजे से शाम 5 बजे तक बच्चों को पढ़ाते हैं। जरूरत पड़ने पर छुट्टियों में भी क्लास लेते हैं। उनके इस प्रयास को उनके छात्रों ने भी सराहा है और उन्होंने मिलकर रोहित के लिए एक इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया है, जहां पढ़ाई से जुड़े वीडियो साझा किए जाते हैं। अब रोहित भविष्य में ऑनलाइन क्लास शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं, ताकि और ज्यादा बच्चों तक पहुंच बनाई जा सके।

रोहित का यह प्रयास सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज में बदलाव की शुरुआत है। उनके काम से आसपास के इलाकों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अभिभावक भी अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर गंभीर हुए हैं।

रोहित कुमार की यह यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादा मजबूत हो, तो सीमित संसाधन भी बड़ी उपलब्धि का रास्ता बना सकते हैं। खुद 10वीं पास न कर पाने वाला यह युवक आज सैकड़ों बच्चों के सपनों को साकार करने में जुटा है।

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