नयी दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर दिल्ली में हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक अनोखी पहल सामने आई है। सरकार “थीम्ड फॉरेस्ट” विकसित करने जा रही है, जो केवल पेड़ लगाने तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के बीच एक नया संबंध स्थापित करेंगे। यह पहल सेंट्रल और साउथ रिज के चुनिंदा इलाकों में लागू की जाएगी, जहां दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विशेष वन तैयार होंगे।
क्यों जरूरी है यह पहल?
दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण और तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौती से जूझ रही है। दिल्ली, जो लंबे समय से प्रदूषण और बढ़ते शहरी दबाव से जूझ रही है, वहां हरित क्षेत्र का विस्तार अब सिर्फ एक पर्यावरणीय जरूरत नहीं, बल्कि जीवन गुणवत्ता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का ग्रीन कवर 371.3 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच गया है, जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 25 प्रतिशत है। इसके बावजूद, प्रदूषण के स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं दिखने से यह साफ है कि अब केवल पेड़ लगाने से आगे बढ़कर योजनाबद्ध और प्रभावी हरित मॉडल अपनाने की जरूरत है।
कहां और कैसे होगा विकास?
इस योजना के तहत सेंट्रल और साउथ रिज के चुनिंदा इलाकों में दो एकड़ से अधिक क्षेत्र में विशेष प्रकार के वन विकसित किए जाएंगे। इन वनों को अलग-अलग थीम पर आधारित किया गया है-जैसे ऋतु वन, नक्षत्र वन, राशि वन, तीर्थंकर वन, पंचवटी वन और बेल वन। इन थीम्स के जरिए पर्यावरणीय पहल को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम देने की कोशिश की गई है। इससे एक ओर जहां लोगों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ेगा, वहीं भारतीय परंपराओं और ज्ञान प्रणाली को भी समकालीन शहरी जीवन में पुनर्स्थापित करने का अवसर मिलेगा।
कैसे होंगे ये थीम्ड वन?
दिल्ली वन विभाग ने कई थीम आधारित वनों की योजना तैयार की है, जिनमें प्रकृति और संस्कृति का अनोखा मेल होगा:
ऋतु वनः विभिन्न मौसमों से जुड़े पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, ताकि सालभर बदलते रंग और प्राकृतिक चक्र को महसूस किया जा सके।
नक्षत्र वनः 27 नक्षत्रों से जुड़े पौधों का रोपण-ज्योतिष और प्रकृति का संगम।
राशि वनः 12 राशियों के अनुसार पेड़ों का चयन, जो व्यक्तित्व और जीवन दर्शन से जुड़े होंगे।
तीर्थंकर वनः जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित-आध्यात्मिकता और शांति का प्रतीक।
पंचवटी वनः रामायण और महाभारत से प्रेरित, पांच पवित्र वृक्षों की अवधारणा पर आधारित।
बेल वनः धार्मिक और औषधीय महत्व वाले बेल वृक्षों पर केंद्रित-साउथ रिज में विकसित होगा।
मौजूदा प्रयासों से मिलेगा बल
दिल्ली सरकार पहले से ही शहरी वनों के विकास पर काम कर रही है। “नमो वन” परियोजना के तहत 17 नए अर्बन फॉरेस्ट विकसित किए जा रहे हैं, जो 177 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले होंगे। इसके अलावा वन महोत्सव 2025-26 के दौरान बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया गया, जो इस व्यापक हरित योजना का ही हिस्सा है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधारना और हरित क्षेत्र को स्थायी रूप से बढ़ाना है।
क्या होंगे इसके फायदे?
विशेषज्ञों का मानना है कि थीम्ड फॉरेस्ट की यह अवधारणा केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का भी एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। ऐसे वन पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे और शहरवासियों को प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने का अवसर देंगे।
दिल्ली का “थीम्ड फॉरेस्ट” मॉडल यह संकेत देता है कि भविष्य के शहर केवल कंक्रीट के ढांचे नहीं होंगे, बल्कि उनमें प्रकृति और संस्कृति का संतुलित विस्तार भी होगा। अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर यह पहल न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है, बल्कि शहरी जीवन को अधिक संतुलित और अर्थपूर्ण बनाने की कोशिश भी है।