लखनऊ/लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर खीरी जिले के 47 गांवों को केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II (VVP-II) योजना के तहत विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत इन गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ आजीविका के अवसर बढ़ाने और कनेक्टिविटी बेहतर करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जिला प्रशासन के अनुसार इन गांवों को सीमावर्ती क्षेत्र के पहले गांवों के रूप में विकसित किया जाएगा। सबसे पहले बेहतरीन सड़कों और दूरसंचार की सुविधा बहाल करने की कोशिश की जाएगी।
लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास दोनों का साथ-साथ आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के माध्यम से इन 47 गांवों में आधारभूत संरचना और रोजगार के अवसरों को मजबूत किया जा रहा है, जिससे सीमावर्ती समुदायों का जीवन स्तर बेहतर हो सके और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के तहत पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और कौशल विकास को बढ़ावा देकर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। साथ ही स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों, युवाओं और महिलाओं को भी सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। जिला सांख्यिकी अधिकारी अरविंद वर्मा के अनुसार इस योजना में शामिल 47 गांवों में से 18 गांव पलिया तहसील और 29 गांव निघासन तहसील में स्थित हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का योजना विभाग इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन का समन्वय करेगा। यह योजना नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, पीलीभीत, बहराइच और लखीमपुर खीरी जिलों के सभी सीमावर्ती गांवों को कवर करेगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति का गठन भी किया गया है, जो विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी और समन्वय सुनिश्चित करेगी।
इस बीच कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश योजना विभाग द्वारा संबंधित जिला अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत प्रस्तावित परियोजनाओं और उनके क्रियान्वयन पर चर्चा की गई।
गृह मंत्रालय के अनुसार “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य के तहत सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 2 अप्रैल 2025 को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II को केंद्रीय क्षेत्र योजना के रूप में मंजूरी दी थी। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2028-29 तक कुल 6,839 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह योजना उन अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों के रणनीतिक गांवों में लागू की जा रही है जो पहले चरण यानी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-I के दायरे में नहीं आते थे। इसके तहत अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू-कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश), लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश), मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती ब्लॉकों के सभी गांवों में चार प्रमुख क्षेत्रों में विकास को सुनिश्चित करना है। इनमें हर मौसम में चलने योग्य सड़क संपर्क, दूरसंचार कनेक्टिविटी, टेलीविजन कनेक्टिविटी और विद्युतीकरण शामिल हैं। सरकारी योजनाओं के जरिए गांवों की तस्वीर बदलने की कोशिश की जाएगी।