तेहरानः मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच तेहरान स्थित ईरान के एक प्रमुख स्पेस रिसर्च सेंटर को हमले में भारी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्टों के अनुसार हमले के बाद यह वैज्ञानिक परिसर काफी हद तक नष्ट हो गया।
यह केंद्र ईरान की स्पेस एजेंसी के तहत काम करने वाला एक महत्वपूर्ण शोध संस्थान था। यहां उपग्रह तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जाता था। वैज्ञानिक यहां सैटेलाइट डिजाइन, रिमोट सेंसिंग, दूरसंचार और अंतरिक्ष से जुड़ी नई तकनीकों के विकास पर शोध करते थे। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के साथ मिलकर वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को प्रशिक्षण भी दिया जाता था।
मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में पहुंच चुका है और इसे क्षेत्र का गंभीर भू-राजनीतिक संकट माना जा रहा है। फरवरी के अंत में स्थिति तब और बिगड़ गई जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए। इन हमलों में सैन्य अड्डों, परमाणु प्रतिष्ठानों और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया था।
इस टकराव की पृष्ठभूमि में लंबे समय से चल रहा तनाव भी है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और मध्य-पूर्व में सक्रिय उसके सहयोगी समूहों को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मतभेद बने हुए थे। 2026 की शुरुआत में कूटनीतिक बातचीत के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश हुई, लेकिन वार्ता सफल नहीं हो सकी और हालात सैन्य टकराव में बदल गए।
हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल के कई शहरों और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की दिशा में बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन भेजे। इनमें खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी संभावित लक्ष्य बने। कुछ हमलों से जान-माल का नुकसान होने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस संघर्ष का असर आसपास के क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह ने लेबनान से इजराइल पर रॉकेट हमले तेज किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी लेबनान में कई स्थानों को निशाना बनाया। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
युद्ध का मानवीय असर भी सामने आ रहा है। ईरान में कुछ हवाई हमलों से स्कूलों, अस्पतालों और रिहायशी इलाकों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। वहीं इजराइल में भी मिसाइल हमलों से नागरिक क्षेत्र प्रभावित हुए हैं। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों को ऊर्जा ढांचे और समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
फिलहाल संघर्ष जारी है और इसके जल्द समाप्त होने के संकेत नहीं दिख रहे हैं। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और देशों ने दोनों पक्षों से तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन सैन्य कार्रवाई जारी रहने से क्षेत्र में लंबे संघर्ष की आशंका बनी हुई है।