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महंगाई के दौर में कालना अस्पताल गेट पर सस्ती थाली, लोगों के चेहरे पर मुस्कान

दूर-दराज से आए मरीजों के परिजनों को मिल रहा सस्ता और साफ-सुथरा भोजन

By सूर्यकांत कुमार, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 26, 2026 10:13 IST

कालनाः पूर्व बर्दवान जिले के कालना महकमा अस्पताल के बाहर इन दिनों एक छोटी-सी दुकान लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह है यहां मिलने वाला सस्ता और भरपेट भोजन। अस्पताल के गेट नंबर एक के सामने दिवाकर घोष नाम के दुकानदार मात्र 10 रुपये में पांच पूड़ी और भरपूर चना मसाला दे रहे हैं। महंगाई के इस दौर में इतनी कम कीमत पर इतना खाना मिलना लोगों के लिए किसी राहत से कम नहीं है।

दिवाकर पहले 10 रुपये में चार पूड़ियां देते थे। लेकिन कई ग्राहकों ने कहा कि इससे पेट पूरी तरह नहीं भरता। लोगों की जरूरत को समझते हुए उन्होंने अगले ही दिन से पूड़ियों की संख्या बढ़ाकर पांच कर दी। साथ में चना मसाला जितना चाहें, उतना दिया जाता है। दिवाकर ने यह भी सोच रखा है कि अगर किसी का पेट फिर भी न भरे तो एक पूड़ी और बढ़ा सकते हैं।

उनकी दुकान पर सुबह करीब आठ बजे से पूड़ी बननी शुरू हो जाती है और दोपहर लगभग तीन बजे तक बिक्री चलती है। कड़ाही में गर्म तेल में पूड़ी तलते हुए दिवाकर बताते हैं कि अस्पताल में दूर-दूर से लोग अपने मरीजों से मिलने आते हैं। हर किसी की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती। कई लोग दिनभर अस्पताल में रहते हैं और बाहर महंगा खाना खरीद पाना उनके लिए मुश्किल होता है। इन्हीं लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर उन्होंने यह पहल शुरू की।

दिवाकर का कहना है कि उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिलती है कि अस्पताल आने वाले लोगों को कम दाम में अच्छा खाना मिल रहा है। वे बताते हैं कि बिक्री की मात्रा ज्यादा होने के कारण थोड़ा-बहुत मुनाफा भी हो जाता है और वे उसी में संतुष्ट हैं।

दुकान पर खाना खा रहे एक मरीज के परिजन गोबिंद देवनाथ ने बताया कि पांच पूड़ी से पेट भर जाता है और चना मसाला भी स्वादिष्ट होता है। उन्होंने यह भी कहा कि दुकान में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता है, जिससे यहां खाना खाने में भरोसा महसूस होता है। वहीं एक अन्य ग्राहक कुमारेश सरकार ने कहा कि मात्र 10 रुपये में इतना भरपेट भोजन मिलना आम लोगों के लिए बड़ी राहत है।

कुछ समय पहले कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के इमरजेंसी गेट के पास भी 10 रुपये में घुगनी खिलाने की पहल चर्चा में आई थी। उसी तरह कालना में दिवाकर घोष की यह कोशिश भी मानवीय संवेदना का उदाहरण बन रही है।

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