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‘हैप्पी बर्थडे’ से बदल रही तस्वीर: घटते नामांकन के बीच बच्चों को स्कूल से जोड़ने की नयी पहल

दक्षिण दिनाजपुर के इस स्कूल ने बच्चों को स्कूल वापस लाने के लिए यह विशेष आयोजन करना शुरू किया है।

By रूपक सरकार, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 15, 2026 10:55 IST

उत्तर दिनाजपुरः राज्य के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। शिक्षा समुदाय इस स्थिति को लेकर चिंतित है। इस बदलती तस्वीर को सुधारने के लिए अलग-अलग स्कूल अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। कोई छात्रों के घरों के आसपास कक्षाएं चला रहा है, तो कोई स्कूल परिसर में फुटबॉल अकादमी बनाकर बच्चों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।

इसी क्रम में इस्माइलपुर प्राइमरी स्कूल ने एक अलग पहल शुरू की है। दक्षिण दिनाजपुर जिले के हिली ब्लॉक के बिंशिरा ग्राम पंचायत स्थित इस स्कूल में शिक्षक विद्यार्थियों का जन्मदिन मनाकर उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

खास तरीके से मनाया जाता है जन्मदिन

स्कूल में हर महीने जिन छात्रों का जन्मदिन होता है, उनकी सूची पहले से तैयार की जाती है। जन्मदिन वाले छात्र को ही कार्यक्रम की व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाती है। तय नियम के अनुसार सभी के जन्मदिन पर केक काटा जाता है। इसके साथ चावल, दाल, अंडा, मीट और चटनी पकाई जाती है और अंत में गुड़ से बना मीठा परोसा जाता है।

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ उत्सव मनाना नहीं, बल्कि बच्चों में स्कूल के प्रति अपनापन और उत्साह पैदा करना है।

नतीजा क्या निकला?

2024-25 शैक्षणिक सत्र में स्कूल में कुल 38 विद्यार्थी थे। 2025-26 सत्र की शुरुआत में देवकुमार लाहा ने हेड टीचर के रूप में स्कूल में कार्यभार संभाला। उनके नेतृत्व में विद्यार्थियों का जन्मदिन मनाने की शुरुआत की गई। उस वर्ष छात्रों की संख्या बढ़कर 46 हो गई। एक वर्ष बाद 2026-27 शैक्षणिक सत्र में नामांकन बढ़कर 57 तक पहुंच गया।

देवकुमार लाहा को उम्मीद है कि विद्यार्थियों का नामांकन आगे भी बढ़ेगा, भले ही संख्या में वृद्धि थोड़ी ही क्यों न हो। वे बताते हैं, “पहले मैं श्यामपुर प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षक था। वहीं पहली बार बच्चों का जन्मदिन मनाने की शुरुआत की गई थी। इस्माइलपुर स्कूल में आने के बाद मैंने यहां भी यह पहल शुरू की।” उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य में दो सहायक शिक्षक प्रितिकना बिस्वास और चंदा ने पूरा सहयोग दिया है। जन्मदिन समारोह का पूरा खर्च शिक्षक स्वयं वहन करते हैं।

हेड टीचर के अनुसार, केवल नामांकन ही नहीं बढ़ा है। बच्चों में रोज स्कूल आने की आदत भी बनी है। पहले औसतन 15 से 20 विद्यार्थी नियमित रूप से आते थे, जबकि अब प्रतिदिन कम से कम 35 विद्यार्थी स्कूल पहुंच रहे हैं।

बच्चों और अभिभावकों का साथ मिला

यह स्कूल मुख्य रूप से मजदूर परिवारों वाले इलाके में स्थित है। अधिकतर विद्यार्थी भी श्रमिक परिवारों से आते हैं। शिक्षकों का मानना है कि सिर्फ जन्मदिन मनाना ही बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए मानसून के दौरान डेंगू के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए स्कूल के आसपास नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विद्यार्थी स्वयं अभिनय करते हैं।

इसके अलावा, शिशु संसद की पहल पर विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से स्कूल परिसर में बगीचा तैयार किया गया है। बगीचे में पौधों की नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी विद्यार्थियों को ही दी गई है।

बच्चों के लिए खास बन रहा है जन्मदिन

स्कूल के विद्यार्थी - बबन महतो, तन्मय माली, माही महतो, उर्मिला रॉय और अभिजीत पाल- सारे बच्चे एक साथ कहते हैं, “घर पर केक नहीं काटा जाता। सर और मैडम हमारे लिए ताली बजाते हैं और ‘हैप्पी बर्थडे टू यू’ कहते हैं। दोस्त भी वहीं होते हैं। हम खूब मस्ती करते हैं।”

इस पहल पर DPSC चेयरमैन संतोष हंसदा ने कहा, “बहुत अच्छी पहल है। मैं उस स्कूल के शिक्षकों को धन्यवाद देता हूं।”

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