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रंजीत का ‘नीलकंठ स्वर्ग’: अनाथ बच्चों के सपनों और सीख का नया ठिकाना

सरकारी शिक्षक की नौकरी से आश्रम तक का सफर-अपने ही खेत में खड़ा किया उम्मीदों का घर।

By शीतल चक्रवर्ती, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 07, 2026 12:26 IST

बालुरघाटः जिन बच्चों के सिर पर छत नहीं, मां-बाप का साया नहीं और दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं, उनके लिए रंजीत कुमार दत्त किसी मसीहा से कम नहीं हैं। अनाथ बच्चों की देखभाल, पढ़ाई, भोजन और संस्कार-हर जिम्मेदारी उन्होंने अपने कंधों पर उठा ली है। कभी सरकारी प्राइमरी स्कूल में शिक्षक रहे रंजीत ने अपने ही खेत की जमीन पर ‘नीलकंठ स्वर्ग’ नाम से एक अनाथ आश्रम खड़ा किया, जो आज सैकड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुका है।

रंजीत कुमार दत्त का जन्म 1956 में दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट स्थित चकमणि गांव में हुआ। बचपन से ही उन्होंने गरीबी और अभाव में जी रहे लोगों को बहुत करीब से देखा। इसी अनुभव ने उनके भीतर वंचित बच्चों के लिए कुछ करने की भावना जगाई। बाद में कुशमंडी के बागडूम इलाके में सरकारी प्राइमरी स्कूल में शिक्षक के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। पढ़ाते-पढ़ाते आसपास के आदिवासी और बेसहारा बच्चों की स्थिति उन्हें भीतर तक कचोटती रही।

इसी भावना से प्रेरित होकर वर्ष 1998 में नौकरी के दौरान ही, उन्होंने अनाथ बच्चों को पढ़ाने की पहल शुरू की। शुरुआत महज 8-10 बच्चों से हुई थी लेकिन आज ‘नीलकंठ स्वर्ग’ आश्रम में 31 बच्चे रह रहे हैं। इन बच्चों की पढ़ाई, रहन-सहन, भोजन और भावनात्मक देखभाल की पूरी जिम्मेदारी रंजीत स्वयं संभाल रहे हैं। अपनी जमा पूंजी का बड़ा हिस्सा और शुभचिंतकों के सहयोग से वह आश्रम को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं।

आश्रम में केवल किताबी शिक्षा ही नहीं दी जाती, बल्कि बच्चों को नैतिकता और मानवता का पाठ भी पढ़ाया जाता है। इसके साथ ही कंप्यूटर प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा, योगाभ्यास, सांस्कृतिक गतिविधियां और जीवन-कौशल विकास की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। आश्रम परिसर में ही खेती की जाती है जिससे बच्चों के भोजन की जरूरतों का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाता है।

रंजीत कुमार दत्त का योगदान यहीं तक सीमित नहीं है। वह गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए इलाज की व्यवस्था भी करते हैं। उनके सामाजिक कार्यों को देखते हुए गंगारामपुर सब-डिविजनल रिपोर्टर्स एसोसिएशन ने उन्हें विशेष सम्मान से नवाजा है।

करीब दस साल पहले नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद भी रंजीत पूरी तरह आश्रम के बच्चों के साथ जुड़े हुए हैं। उनका कहना है, “इन बच्चों के साथ रहने के लिए ही मैंने नीलकंठ स्वर्ग अनाथ आश्रम बनाया। बहुत से लोगों ने मुझे सहयोग दिया है। जब तक जिंदा रहूंगा, आश्रम चलाता रहूंगा। इन बच्चों की मीठी मुस्कान देखना मुझे सबसे अच्छा लगता है।”

राज्य के उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री बिप्लब मित्र ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि जरूरत पड़ने पर सरकार की ओर से सहयोग किया जाएगा। कुशमंडी की विधायक रेखा राय और गंगारामपुर के एसडीओ अभिषेक शुक्ला ने भी इसी तरह का भरोसा दिलाया है। इसके अलावा चांचल थाने के आईसी मनोजीत सरकार और गंगारामपुर महकुमा अदालत के अधिवक्ता रंजन पांडे नियमित रूप से आश्रम को सहयोग कर रहे हैं।

रंजीत कुमार दत्त का ‘नीलकंठ स्वर्ग’ आज सिर्फ एक आश्रम नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए भविष्य का रास्ता है, जिनके पास कभी सपने देखने का भी अवसर नहीं था।

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