नयी दिल्लीः भारत में सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या हैं। साल 2024 में 1,77,177 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई यानी हर दिन लगभग 485 जानें गईं। इतने बड़े आंकड़े ने साफ कर दिया है कि सिर्फ ट्रैफिक पुलिस और पारंपरिक निगरानी से इस समस्या को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल है।
अब इस चुनौती से निपटने के लिए रीयल-टाइम AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) तकनीक का इस्तेमाल बढ़ रहा है। खास तरह के AI कैमरे वाहनों में लगाए जा रहे हैं, जो चालक के व्यवहार पर लगातार नजर रखते हैं। ये कैमरे यह पहचान सकते हैं कि ड्राइवर बहुत तेज चला रहा है, सामने वाले वाहन के बहुत करीब है, लेन से भटक रहा है, अचानक ब्रेक लगा रहा है, मोबाइल फोन चला रहा है या ध्यान भटका हुआ है।
सबसे खास बात यह है कि ये सिस्टम दुर्घटना होने के बाद की जांच नहीं करता, बल्कि हादसा होने से पहले ही चेतावनी देता है। जैसे ही जोखिम बढ़ता है, वाहन के अंदर तुरंत अलर्ट बजता है ताकि चालक सावधान हो जाए। इसका उद्देश्य ड्राइवर को सजा देना नहीं, बल्कि समय रहते उसे सचेत करना है।
यह AI सिस्टम ड्राइवर की आंखों की हरकत, पलक झपकने की गति और सिर की हलचल से यह भी समझ सकता है कि वह नींद में तो नहीं जा रहा। इससे माइक्रो-स्लीप यानी कुछ सेकंड की झपकी जैसी खतरनाक स्थिति को भी रोका जा सकता है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, ओवरस्पीडिंग 60 प्रतिशत से ज्यादा सड़क मौतों की वजह है। ऐसे में यह तकनीक खास तौर पर तेज रफ्तार और लापरवाही को कम करने में मदद कर रही है।
इसका असर भी दिखने लगा है। कुछ कंपनियों ने बताया कि इस AI सिस्टम के इस्तेमाल से दुर्घटनाओं में 50 प्रतिशत तक कमी आई है। उनींदे होकर गाड़ी चलाने की घटनाएं 74 प्रतिशत घटी हैं और ध्यान भटकाकर ड्राइविंग में 38 प्रतिशत कमी आई है।
शुरुआत में लोगों को लगा कि यह जासूसी करने वाला कैमरा है, लेकिन अब इसे सुरक्षा कोच के रूप में देखा जा रहा है। यह सिस्टम ड्राइविंग का पूरा रिकॉर्ड रखता है और सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को बेहतर रेटिंग देता है। जरूरत पड़ने पर वीडियो सबूत से ड्राइवर को गलत आरोपों से भी बचाया जा सकता है।
यह तकनीक अभी 3,000 से ज्यादा फ्लीट यानी वाहन समूहों में इस्तेमाल हो रही है। माल ढुलाई, खतरनाक सामान के परिवहन, ई-कॉमर्स डिलीवरी और बस सेवाओं में इसका उपयोग किया जा रहा है।
AI अब सिर्फ तकनीक या ऑटोमेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय सड़कों पर जान बचाने का एक मजबूत साधन बनता जा रहा है।