गुवाहाटीः असम विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले गुवाहाटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक दिवसीय असम दौरे के दौरान 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य कनेक्टिविटी बढ़ाना, डिजिटल ढांचे को मजबूत करना, उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करना और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना है। सबसे प्रमुख परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी पर बना छह लेन का ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ है, जिसकी लागत लगभग 3,030 करोड़ रुपये है। यह पुल गुवाहाटी को उत्तर गुवाहाटी से जोड़ेगा और यात्रा समय को लगभग 30 मिनट से घटाकर सिर्फ 7 मिनट कर देगा। कुल 7.75 किलोमीटर लंबे इस पुल में नदी पर 1.24 किलोमीटर का मुख्य हिस्सा शामिल है। यह पूर्वोत्तर का पहला एक्स्ट्राडोज्ड प्री-स्ट्रेस्ड कंक्रीट (पीएससी) पुल है, जिसमें भूकंप की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग’ तकनीक और ‘ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम’ लगाया गया है। इसकी आधारशिला 9 फरवरी 2019 को रखी गई थी और 1 मार्च 2020 से निर्माण कार्य शुरू हुआ था। प्रारंभिक लागत 2,608 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 3,030 करोड़ रुपये हो गई। पुल 28 फरवरी तक केवल पैदल यात्रियों के लिए खुला रहेगा।
प्रधानमंत्री ने आईआईएम गुवाहाटी के अस्थायी परिसर का भी वर्चुअल उद्घाटन किया। इस संस्थान की मुख्य परियोजना पर 555 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह पूर्वोत्तर का दूसरा और देश का 22वां आईआईएम है। स्थायी परिसर गुवाहाटी के पास पलासबाड़ी में विकसित किया जाएगा, जबकि फिलहाल शैक्षणिक सत्र टेक सिटी, बोंगोरा स्थित अस्थायी परिसर से शुरू होगा और इसकी निगरानी आईआईएम अहमदाबाद करेगा। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च और प्रबंधन शिक्षा को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
इसके अलावा, कामरूप जिले के अमिंगांव में 348 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित राष्ट्रीय डेटा सेंटर का भी वर्चुअल उद्घाटन किया गया। 8.5 मेगावाट क्षमता वाला यह अत्याधुनिक डेटा सेंटर विभिन्न सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण डिजिटल कार्यों की मेजबानी करेगा और अन्य डेटा सेंटर के लिए आपदा पुनर्प्राप्ति केंद्र के रूप में भी काम करेगा। इससे पूर्वोत्तर राज्यों में डिजिटल सेवाएं अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से उपलब्ध होंगी। प्रधानमंत्री ने डिब्रूगढ़ जिले के मोरान में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा का भी उद्घाटन किया, जिससे आपात स्थिति में विमानों की सुरक्षित लैंडिंग संभव हो सकेगी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही, पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत 225 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाई गई, जिनमें से 100 बसें गुवाहाटी, 50-50 नागपुर और भावनगर तथा 25 चंडीगढ़ के लिए हैं। इन बसों के संचालन से चार शहरों में 50 लाख से अधिक लोगों को स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिलेगी, जिससे प्रदूषण कम होगा और शहरी यातायात व्यवस्था में सुधार आएगा।