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पान-गुटखा की पीक से लाल हुआ सुप्रीम कोर्ट परिसर, नशा रोकने के लिए अदालत का दिशा-निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की दीवारों और फर्श पर गुटखा के लाल लाल धब्बे हैं। कोई नाक सिकोड़कर देख रहा है, तो कोई मुँह पर रुमाल दबा रहा है। पूरी तरह ही घिनौना नजारा है।

By कौशिक भट्टाचार्य, Posted by : राखी मल्लिक

Feb 14, 2026 18:04 IST

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट भी इससे अछूता नहीं रहा। दीवारों, बेसिनों और यहां तक कि फर्श पर भी गुटखे की पीक फैली हुई है। नशे के आदी लोग पान-मसाला खाकर थूक रहे हैं और उसी के पास से uहोकर देश के वरिष्ठ वकीलों और न्याय की मांग करने वालों को गुजरना पड़ रहा है। कोई नाक सिकोड़ रहा है, तो कोई मुंह पर रुमाल रख रहा है। स्थिति बेहद घिनौनी हो गई है। इस हालात को संभालने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट?

गुटखे की पीक से सर्वोच्च अदालत परिसर को बचाने के लिए 11 फरवरी को दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसमें कहा गया है कि अदालत में आने वाले कई लोग गुटखा, पान-मसाला और तंबाकू चबाकर दीवारों के कोनों और वॉश बेसिन में थूक रहे हैं। इससे न केवल अदालत परिसर गंदा हो रहा है, बल्कि जल निकासी व्यवस्था भी बाधित हो रही है। दिशा-निर्देश में यह आशंका भी जताई गई है कि गुटखे की पीक से संक्रमण फैलने की संभावना है।

सभी से अपील

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों और न्याय की मांग लेकर आने वाले लोगों से अदालत परिसर को साफ-सुथरा रखने की अपील की है। निर्देश में कहा गया है कि सभी से अनुरोध है कि अदालत परिसर में गुटखा, पान-मसाला खाकर थूकें नहीं। स्वच्छता बनाए रखें। अदालत ने यह भी कहा है कि इस स्थिति से न्याय मांगने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

देशभर में एक जैसी स्थिति

हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, पुलों, हाईवे और सड़कों पर जगह-जगह गुटखा और पान की पीक के लाल निशान दिखाई देते हैं। इससे लोग परेशान हैं। 2016-17 के वित्त वर्ष में ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार देश के 29.6 प्रतिशत पुरुष गुटखे के आदी हैं। महिलाएं भी पीछे नहीं हैं,12.8 प्रतिशत महिलाएं भी गुटखे का सेवन करती हैं।

प्रतिबंध के बावजूद बिक्री जारी

9 अक्टूबर 2017 को भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने गुटखा और पान-मसाला के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर इन नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की यह घटना मानो यह दिखाती है कि प्रतिबंध के बाद भी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

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