नई दिल्ली: नेता विपक्ष राहुल गांधी ने संसद भवन में देश के विभिन्न हिस्सों के 17 प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। बैठक का मुख्य विषय भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता था, जिसे लेकर किसानों ने गंभीर चिंताएं जताई।
किसानों ने विशेष रूप से मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवों की खेती पर समझौते के संभावित नकारात्मक प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने देशव्यापी आंदोलन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। बैठक में शामिल प्रतिनिधियों में सुखपाल खैरा, अशोक बलहरा, पी.टी. जॉन, तेजवीर सिंह और बलदेव जिरा जैसे प्रमुख किसान नेता थे।
समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय वस्त्र, चमड़ा, जूते और फार्मास्यूटिकल्स पर शुल्क 50% से घटाकर 18% करने पर सहमति दी है। भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा, बोइंग विमान, तकनीक और कोकिंग कोल में 500 बिलियन डॉलर की खरीद करेगा। भारतीय मसाले, चाय, कॉफी, आम, अंगूर और काजू अमेरिका में बिना शुल्क पहुंच सकेंगे, जबकि गेहूं, चावल, मक्का, दूध और अन्य संवेदनशील उत्पाद संरक्षित रहेंगे। जीएम उत्पादों का आयात पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
बैठक के बाद राहुल गांधी ने कहा कि वह किसानों के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, जिसमें FIR दर्ज कराना, प्रिविलेज मोशन लाना और अन्य कानूनी कदम शामिल हैं। उन्होंने सरकार पर “किसानों के खिलाफ” होने और “देश को बेचने” का आरोप लगाया।
विश्लेषकों के अनुसार, विपक्ष और किसान नेता मिलकर समझौते के विरोध में व्यापक आंदोलन को गति देने की तैयारी कर रहे हैं। यह मुद्दा आने वाले महीनों में देश की राजनीतिक और आर्थिक बहस में अहम भूमिका निभा सकता है।