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दूध से दवा तक जीएसटी पर सवाल, अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार को घेरा, कहा-

लोकसभा में बजट पर बहस के दौरान निर्मला सीतामरण के वक्तव्य पर तृणमूल सांसद ने कहा ‘कानून और ज़मीनी हकीकत में फर्क’

By डॉ. अभिज्ञात

Feb 12, 2026 15:07 IST

नई दिल्ली: केन्द्रीय बजट पर लोकसभा में हुई बहस के दौरान बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सदन में “सबको ज्ञात तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया।” उन्होंने अभिषेक के एक दिन पहले सदन में उठाये गये सवालों पर सरकार का पक्ष रखा।

अभिषेक बनर्जी ने सीतारमण के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। उन्होंने X पर अपने पोस्ट में कहा कि वित्त मंत्री ने उनके आरोपों पर जो सफाई दी है, उसमें कोई ठोस आधार नहीं है और वह जमीनी हकीकत को नहीं दर्शाती।


अभिषेक बनर्जी ने X पर पोस्ट में कहा कि वह वित्त मंत्री को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने उनके भाषण को ध्यानपूर्वक सुना, लेकिन साथ ही यह अपेक्षा भी जताई कि बंगाल के लोगों की बात भी उतनी ही गंभीरता से सुनी जाए, जब वे मनरेगा (MGNREGA), प्रधानमंत्री आवास योजना (PMGSY), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और जल जीवन मिशन (JJM) के बकाया की मांग कर रहे हैं। उन्होंने वित्त मंत्री के इस आरोप को खारिज किया कि उन्होंने तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया है।

जीएसटी के मुद्दे पर बोलते हुए तृणमूल सांसद ने कहा कि तकनीकी रूप से भले ही ताज़ा तरल दूध पर कोई जीएसटी नहीं लगता, लेकिन हकीकत यह है कि जो गरीब परिवार ताज़ा दूध नहीं खरीद सकते, वे शिशुओं के लिए पाउडर दूध का सहारा लेते हैं, जिस पर 5 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिसे खरीदना संभव नहीं है उस पर शून्य कर और जिसे मजबूरी में खरीदना पड़ता है उस पर कर लगाया जाना ही असली समस्या है।

शिक्षा से जुड़े खर्चों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकें भले ही जीएसटी-मुक्त हों, लेकिन छात्रों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ग्राफ पेपर, विज्ञान की प्रायोगिक कॉपी और ड्रॉइंग क्लास की क्रेयॉन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है, जो आम परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि परामर्श और इलाज पर जीएसटी नहीं है, यह बात सही है, लेकिन कोविड मरीज की जान बचाने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर पर 12 प्रतिशत, मधुमेह रोगियों के लिए जरूरी इंसुलिन इंजेक्शन पर 5 प्रतिशत और सर्जरी में इस्तेमाल होने वाले एनेस्थीसिया पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है।

अंतिम संस्कार सेवाओं को कर-मुक्त बताए जाने पर भी अभिषेक बनर्जी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि दिवंगत आत्माओं के लिए जलाई जाने वाली अगरबत्ती पर 5 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘न्यू इंडिया’ में शोक की भी एक कीमत तय कर दी गई है।

उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में कहा कि यही वह मूल समस्या है, जिसे वह उजागर करना चाहते थे। जब तक जीएसटी अधिनियम में लिखी बातों और एक गरीब परिवार की किराने की पर्ची पर दर्ज वास्तविकता के बीच का अंतर नहीं समझा जाएगा, तब तक सरकार और आम जनता की दुनिया अलग-अलग बनी रहेगी।

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