कोलकाताः केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुधवार को राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी। इसमें कहा गया है कि जब भी राष्ट्रगीत (वंदे मातरम) बजेगा, तो सभी को खड़े होकर सम्मान दिखाना होगा। अगर राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत एक साथ गाए जाते हैं, तो सबसे पहले वंदे मातरम आएगा। इस गाइडलाइन को लेकर बंगाल में हंगामा शुरू हो गया है। तृणमूल ने दावा किया कि BJP फिर से बंटवारे का कार्ड खेलना चाहती है। BJP ने भी जवाबी तर्क दिया है। इस बारे में गुरुवार को तृणमूल भवन में राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु और वित्त विभाग की स्वतंत्र प्रभार मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और पार्टी की ओर से केंद्र पर हमला किया।
वहां, ब्रत्य बसु ने कहा, 'हम बंकिम चंद्र चटर्जी और वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। लेकिन BJP जिस तरह से इसे पेश कर रही है, वह लोगों और रवींद्रनाथ टैगोर को नीचा दिखा रही है।' उन्होंने आगे कहा, 'BJP को रवींद्रनाथ टैगोर पसंद नहीं हैं क्योंकि वे सेक्युलर थे। उन्होंने पूरी जिंदगी धर्म और जाति के बीच एकता लाने की कोशिश की। यह बात उनकी लिखी बातों में बार-बार आई है। उनका खुला नजरिया कम्युनल ताकतों को पसंद नहीं आया। इस आदेश के जरिए असल में बंकिम चंद्र को महान बनाने के नाम पर रवींद्रनाथ को नीचा दिखाया जा रहा है।' उन्होंने दावा किया कि यह आदेश तीन महीने तक लागू रहेगा। ब्रत्य बसु ने साफ साफ कहा कि ऐसा सिर्फ बंगाल में चनावों को ध्यान में रखकर किया गया है। ममता बनर्जी के बंगाल में चुनाव जीतने के बाद, यह बयानबाजी सब खत्म हो जाएगी।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने मोदी के 'बंकिमदा' संबोधन का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि यह ऑर्डर उस जख्म पर मरहम लगाने की कोशिश है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गलती से 'बंकिमदा' कहकर संबोधन किया था।
हालांकि इस विवाद पर भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने कहा, 'मोदीजी ने बार-बार रवींद्रनाथ टैगोर का जिक्र किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे रवींद्र संगीत सुनते हैं। तृणमूल कांग्रेस अपने रास्ते से भटक गई है। अब तक वह बंगालियों और गैर-बंगालियों के बीच पॉलिटिक्स करती रही है। अब वो ऐसा करने में नाकाम हो रही है। उन्हें तो इस पर गर्व होना चाहिए कि वंदे मातरम को इतना ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। बजाय खुश होने के टीएमसी द्वारा अब रविंद्रनाथ और ऋषि बंकिम चंद्र के बीच फर्क पैदा किया जा रहा है।'