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ASDD लिस्ट में नाम होने पर भी वोटिंग संभव: चुनाव आयोग

SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट में माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका पर उठे सवाल।

By शुभ्रजीत चक्रवर्ती, Posted by: श्वेता सिंह

Feb 13, 2026 00:39 IST

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2025) के तहत जारी ड्राफ्ट सूची में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम बाहर हो जाने के बाद विवाद गहराया हुआ है। यह सूची ASDD (Absent, Shifted, Dead, Duplicate) यानी मृत, फर्जी, स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं की सूची के रूप में सामने आई थी। इस पर कई शिकायतें दर्ज की गईं।

इसी बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ASDD सूची में हैं, वे भी कुछ शर्तों के तहत मतदान कर सकते हैं।

किस तरह दे सकेंगे वोट?

CEO कार्यालय के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का नाम ASDD सूची में शामिल है, तो वह मतदान के दिन संबंधित पोलिंग स्टेशन पर आवश्यक प्रमाण के साथ उपस्थित होकर वोट दे सकता है। उसे यह साबित करना होगा कि वह जीवित है और उसकी मतदाता संबंधी जानकारी सही है। इसके बाद उसे प्रिसाइडिंग ऑफिसर के समक्ष एक डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा। इसमें वह अपनी पूरी जानकारी देगा, जिसकी पूरी जांच की जाएगी।

हालांकि, राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यदि बाद में यह साबित होता है कि किसी मतदाता ने गलत जानकारी देकर मतदान किया है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

SIR में अधिकारियों की तैनाती पर स्थिति

SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि राज्य सरकार दस्तावेजों के सत्यापन में सहायता के लिए 8,805 ग्रुप-B अधिकारियों को उपलब्ध कराएगी। राज्य सरकार (नवान्न) की ओर से अधिकारियों की सूची पहले ही चुनाव आयोग को सौंप दी गई थी।

चुनाव आयोग के अनुसार, 10 फरवरी तक लगभग 6,000 अधिकारी इस कार्य में शामिल हो चुके थे। इनमें से करीब 500 AERO (Assistant Electoral Registration Officer) भी हैं, जो वर्तमान में SIR प्रक्रिया में सक्रिय हैं।

हालांकि, आयोग का कहना है कि अभी सभी 8,805 अधिकारी कार्यभार ग्रहण नहीं कर पाए हैं। साथ ही, राज्य द्वारा भेजी गई सूची में शामिल कुछ लोग ग्रुप-B श्रेणी के अधिकारी नहीं हैं।

माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल

पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में माइक्रो ऑब्जर्वर की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। अदालत ने निर्देश दिया कि माइक्रो ऑब्जर्वर के साथ-साथ राज्य द्वारा उपलब्ध कराए गए ग्रुप-B अधिकारी भी SIR प्रक्रिया में सहायता कर सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल ERO (Electoral Registration Officer) के पास ही रहेगा।

मंगलवार शाम तक 8,805 अधिकारियों को कार्य में शामिल किए जाने की सूचना दी गई थी, लेकिन चुनाव आयोग का दावा है कि सभी अधिकारियों ने अभी तक जॉइन नहीं किया है।

इसके अतिरिक्त, जिला मजिस्ट्रेट (DM) या जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) से यह भी रिपोर्ट मांगी गई थी कि किस जिले में कितने अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। CEO कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, यह रिपोर्ट अभी तक पूरी तरह प्राप्त नहीं हुई है। अब तक केवल दार्जिलिंग और अलीपुरद्वार जिलों से ही रिपोर्ट जमा की गई है।

SIR 2025 को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल जारी है। एक ओर ASDD सूची में नाम शामिल होने के बावजूद मतदान का अवसर देने की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है, वहीं अधिकारियों की तैनाती और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया पर अब सबकी नजरें टिकी हैं।

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