कोलकाताः केंद्र सरकार की श्रम, कृषि, उद्योग और वाणिज्य समेत विभिन्न नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल का आह्वान किया। इस हड़ताल में बैंकिंग क्षेत्र के यूनियनों के संयुक्त मंच ने भी भाग लिया। हालांकि पूरे देश में आम हड़ताल का असर देखने को मिला, लेकिन पश्चिम बंगाल में इसका प्रभाव मिला-जुला रहा।
राज्य में गुरुवार को उच्च माध्यमिक परीक्षा भी शुरू हुई। परीक्षार्थियों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। जिला मुख्यालयों और महत्वपूर्ण सड़कों पर ट्रैफिक नियंत्रण की विशेष व्यवस्था की गई।
अधिकांश जगहों पर कामकाज सामान्य
हावड़ा से उत्तर 24 परगना, मालदा से बांकुड़ा तक विभिन्न जिलों में वामपंथी ट्रेड यूनियनों के नेता और कार्यकर्ता विरोध मार्च निकालते नजर आए। इसके बावजूद अधिकांश जगहों पर कारखाने, बैंक और जूट मिल खुले रहे।
न्यू टाउन के ऑफिस इलाके से लेकर हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र तक हड़ताल का खास असर नहीं दिखा। सरकारी दफ्तरों में 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज की गई।
कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में हड़ताल समर्थक विभिन्न बैंकों में पहुंचे और कर्मचारियों से काम बंद रखने की अपील की। दूसरी ओर, हल्दिया औद्योगिक क्षेत्र में हड़ताल का खास प्रभाव नहीं पड़ा। हालांकि विभिन्न उद्योग संस्थानों के सामने सीटू (CITU) की ओर से पिकेटिंग और विरोध प्रदर्शन किया गया। अधिकांश कारखानों में कर्मचारी काम पर उपस्थित रहे।
जूट मिलों में आंशिक असर
हुगली के भद्रेश्वर स्थित श्यामनगर नॉर्थ जूट मिल में मजदूर काम पर नहीं पहुंचे। मिल गेट पर हड़ताल समर्थकों ने पिकेटिंग की। सुबह की शिफ्ट में मजदूर पहुंचे जरूर, लेकिन मिल में प्रवेश नहीं किया।
हावड़ा के बाली जूट मिल के सामने बंगाल जूट मिल मजदूर यूनियन के सदस्यों ने पिकेटिंग की। वहां उपस्थिति कम रही। सुबह INTTUC की ओर से मिल खोलने की कोशिश की गई, हालांकि कहीं से किसी बड़े टकराव की खबर नहीं मिली। हुगली के बांसबेड़िया स्थित गैंजेस जूट मिल में भी मजदूरों ने काम नहीं किया और गेट पर पिकेटिंग की गई।
बांकुड़ा और मालदा में विरोध प्रदर्शन
बांकुड़ा के बड़ा जोड़ा औद्योगिक क्षेत्र और शहर में सुबह से ही वामपंथी श्रमिक संगठन के समर्थक जुटे। नारे, बैनर और प्लेकार्ड के साथ हड़ताल के समर्थन में प्रदर्शन किया गया। मालदा शहर में विभिन्न बैंक और बीमा कार्यालयों के सामने पिकेटिंग की गई। श्रम संहिता रद्द करने, बिजली कानून वापस लेने, कृषि ऋण माफ करने और समान काम के लिए समान वेतन जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई गई। इस कार्यक्रम में सीटू के जिला अध्यक्ष प्रणब दास, नेता अम्बर मित्र, नीलय गंगोपाध्याय, मिंटू चौधरी और नुरुल इस्लाम समेत अन्य नेता भी शामिल हुए।
बोलपुर में हल्की झड़प
हड़ताल के दौरान बोलपुर में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। चित्रा मोड़ के पास हड़ताल समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई।
इस संबंध में सीपीएम (CPIM) के जिला सचिव गौतम घोष ने कहा, “आज का बंद भाजपा के खिलाफ है, लेकिन तृणमूल की पुलिस ने रुकावट डाली।”
कुल मिलाकर, केंद्र की नीतियों के खिलाफ वामपंथी संगठनों द्वारा बुलाई गई इस देशव्यापी हड़ताल का पश्चिम बंगाल में सीमित और मिला-जुला प्रभाव देखने को मिला। परीक्षा के मद्देनजर प्रशासन की सख्ती और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के कारण जनजीवन काफी हद तक सामान्य रहा। हालांकि कुछ औद्योगिक क्षेत्रों और जूट मिलों में आंशिक असर जरूर पड़ा।