कोलकाता : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक शक्ति बढ़ाने में भारत के साथ दक्षिण अफ्रीका भी शामिल है। जिन पाँच देशों ने ‘ब्रिक्स’ (BRICS) का गठन किया है उनमें भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों ही हैं। पर्यटन के विकास के लिए इस बार मित्र देश भारत में दक्षिण अफ्रीका का पर्यटन विभाग सक्रिय हुआ है।
बुधवार को संस्था के प्रतिनिधि कोलकाता में उपस्थित थे। एक ओर मोहनदास गांधी और दूसरी ओर क्रिकेट के कारण दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत के संबंध अत्यंत घनिष्ठ हैं। विभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के ‘चाँदेर पहाड़’ (Chander Pahar) के कारण वहाँ के वन्यजीवों और विस्तृत रिक्टर्सवेल्ड (Richtersveld) के बारे में बंगालियों की स्पष्ट धारणा भी है लेकिन इस बार उस देश का पर्यटन विभाग ‘अनजाना दक्षिण अफ्रीका’ को यात्रा प्रेमियों के सामने प्रस्तुत करना चाहता है।
हर वर्ष औसतन लगभग 70 हजार भारतीय पर्यटक दक्षिण अफ्रीका घूमने जाते हैं। इस आँकड़े में कोलकाता से जाने वाले लोगों की संख्या अधिकतम तीन से चार हजार है। इस संख्या को और बढ़ाने के लिए दक्षिण अफ्रीका का पर्यटन विभाग प्रयास शुरू कर चुका है।
बुधवार को उस देश के पर्यटन संगठन की प्रवक्ता मिताली कर्माकर ने कोलकाता में मीडिया से कहा कि कोविड के बाद स्थिति सामान्य होने पर भी पर्यटन अभी पहले जैसा नहीं हुआ है। फिर भी हम आशावादी हैं। 2027 में दक्षिण अफ्रीका में क्रिकेट विश्वकप आयोजित होने जा रहा है। हमें उम्मीद है कि यह पर्यटन के क्षेत्र में ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।
मिताली ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका यात्रा के दौरान भारतीयों को दो समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहली भारत से दक्षिण अफ्रीका के लिए कोई सीधी उड़ान नहीं है। दुबई में रुककर जाना पड़ता है। इसके अलावा वीजा को लेकर भी काफी दिक्कतें होती हैं। हालांकि हम भारत के साथ सीधी हवाई सेवा शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही पाँच दिनों के भीतर वीजा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम चल रहा है।
आमतौर पर भारतीय पर्यटक दक्षिण अफ्रीका जाने पर केप टाउन, जोहान्सबर्ग, डरबन और क्रूगर नेशनल पार्क के पुमालांगा प्रांत वाले हिस्से को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा मोहनदास गांधी से जुड़े स्थानों के प्रति भी भारतीयों का विशेष आकर्षण है लेकिन इस बार दक्षिण अफ्रीका पर्यटन विभाग लिम्पोपो प्रांत में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। क्रूगर नेशनल पार्क का अधिकांश हिस्सा लिम्पोपो में पड़ता है फिर भी वहाँ भारतीय पर्यटक अपेक्षाकृत कम जाते हैं।
पर्यटन विभाग की योजना में ड्राकेंसबर्ग पर्वतमाला को भी लोकप्रिय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना शामिल है। इस पर्वतमाला के जायंट्स कैसल क्षेत्र में लगभग 35 हजार गुफा-चित्र मौजूद हैं। इसके अलावा उस देश का क्लैरेंस शहर भी धीरे-धीरे पर्यटन मानचित्र पर उभर रहा है। यहाँ माउंटेन बाइकिंग, घुड़सवारी के साथ-साथ ‘फॉसिल हंटिंग’ जैसी आकर्षक गतिविधियाँ भी उपलब्ध हैं। शहर के पास ही एक पुरातात्विक क्षेत्र है जहाँ असंख्य डायनासोर जीवाश्म बिखरे पड़े हैं। घूम-घूमकर उन्हें खोजने का आनंद ही अलग है।