कोलकाता : शहर की फुटपाथ पर फिर बढ़ रहा है हॉकरों का दबदबा। कई नियम लागू कर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करने वाली कोलकाता नगर निगम अब धीरे-धीरे हॉकर नियंत्रण में ढील दे रही है। शहर की फुटपाथ पर हाकरों की बढ़ती उपस्थिति के बाद, नवनन्न से खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दो साल पहले इस पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद नगर निगम ने हाकर नियंत्रण में सक्रियता दिखाई।
शहर भर में हाकरों का सर्वे किया गया। सूचीबद्ध हाकरों को नगर निगम की ओर से वेंडिंग प्रमाणपत्र देने की घोषणा की गई थी। हाकर नियंत्रण के लिए नगर निगम ने फुटपाथ पर पीली रेखाएं खींची, ताकि पैदल यात्रियों के रास्ते में कोई बाधा न हो। प्रमुख सड़क मोड़ों पर हाकरों को केवल निर्धारित स्थान पर बैठने की अनुमति थी। किसी भी जगह स्थायी ढांचा नहीं लगाया जा सकता था और पिच वाली सड़क पर हाकरिंग नहीं हो सकती थी। ये सभी नियम टाउन वेंडिंग कमिटी की बैठक में शहर में हाकर नियंत्रण के लिए तय किए गए थे। उस समय नगर निगम के सर्वे में शहर भर में लगभग 55,000 हाकरों को चिन्हित किया गया था।
लेकिन समय के साथ शहर भर में हाकर नियंत्रण के नियम - कानून धीरे-धीरे ढीले होने लगे हैं। हाथिबागान, श्यामबाजार, शियालदह, कॉलेज स्ट्रीट, एस्प्लानेड, गड़ियाहाट, लेक मार्केट, जादवपुर, टालीगंज, बेहाला, खिदिरपुर जैसी हाकरों से भरी जगहों पर फिर फुटपाथ हाकरों के कब्जे में आ गए हैं। कई जगह हाकर नियंत्रण के लिए खींची गई पीली रेखाएं भी मिट गई हैं। नगर निगम सूत्रों के अनुसार हाकरों को प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया भी ठहरी हुई है।
कोलकाता नगर निगम मुख्यालय के पास न्यू मार्केट में भी हाकरों का दबदबा बढ़ा है। शिकायत है कि यहां भी दिन से रात तक हाकर अवैध रूप से काम कर रहे हैं। हालांकि कोलकाता के कई हाकर यूनियन इस दावे को मानने से इनकार करते हैं। उनका कहना है कि अधिकांश हाकर टाउन वेंडिंग कमिटी की बैठक में तय किए गए नियमों के अनुसार ही हाकरिंग कर रहे हैं।
शहर के कुछ स्थानों पर नियम टूटने की शिकायत आने पर टाउन वेंडिंग कमिटी तुरंत हस्तक्षेप कर समस्या हल करता है। नगर निगम के हाकर पुनर्वास विभाग के मेयर परिषद देवाशिस कुमार का कहना है कि कोई प्रक्रिया रुकी नहीं है। हाकरों की समस्या बड़ी है। एक रात में इसे हल करना कठिन है। नगर निगम इसे चरणबद्ध तरीके से सुलझा रहा है।