कोलकाताः पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले जारी राजनीतिक हलचल के बीच राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर चल रही बहस पर स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह मुद्दा अब “क्लोज्ड चैप्टर” हो चुका है।
मीडिया से बातचीत में गुरुवार को राज्यपाल ने कहा, “स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) का अध्याय अब शीर्ष अदालत के फैसले के बाद खत्म हो चुका है। यदि इस प्रक्रिया के संचालन में कोई कमी रही होगी, तो उसे निश्चित रूप से संतुलित तरीके से संबोधित किया जाएगा।”
सुप्रीम कोर्ट का रुख साफ
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को यह स्पष्ट कर दिया था कि वह वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को पूरा करने में किसी भी तरह की बाधा की अनुमति नहीं देगा। अदालत के इस रुख ने चुनावी तैयारियों से जुड़े मुद्दों पर चल रही आशंकाओं और विवादों के बीच एक निर्णायक संकेत दिया।
राज्यपाल का बयान इसी संदर्भ में सामने आया है। राजनीतिक विश्लेषक चुनावी माहौल को स्थिर रखने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देख रहे हैं।
चुनाव आयोग पर भरोसा
आगामी विधानसभा चुनावों का उल्लेख करते हुए बोस ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग निश्चित रूप से यह सुनिश्चित करेगा कि बंगाल में चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों।”
बंगाल में चुनाव को लेकर सियासी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। रैलियों, बैठकों और रणनीतिक बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है। ऐसे समय में राज्यपाल की ओर से चुनाव आयोग पर सार्वजनिक रूप से जताया गया विश्वास चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा जरूरी
राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी प्रक्रिया और उसे संचालित करने वाली संस्थाओं में जनता का विश्वास बना रहना लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी स्तर पर कोई कमी पाई जाती है, तो उसे संतुलित और निष्पक्ष तरीके से दूर किया जाएगा।
एसआईआर पर हंगामे के बीच बयान
विधानसभा चुनाव से पहले राज्य का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। विभिन्न दल अपने-अपने मुद्दों को धार दे रहे हैं और मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे दौर में एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख और राज्यपाल का बयान, दोनों ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता और स्थिरता का संदेश देते हैं।
राज्यपाल के बयान से यह संकेत मिलता है कि संवैधानिक संस्थाएं चुनावी प्रक्रिया को सुचारु और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी तरह की बाधा को स्वीकार नहीं किया जाएगा।