मुंबईः बॉम्बे हाई कोर्ट ने भगोड़े विजय माल्या को भारत लौटने का आखिरी मौका दिया है। फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोपी और भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट में गुरुवार को बड़ा झटका लगा। हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा कि माल्या कोर्ट की प्रक्रिया से बच नहीं सकते और उन्हें भारत लौटकर कानूनी लड़ाई का सामना करना होगा।
जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच ने कहा कि विजय माल्या को “एक आखिरी मौका” दिया जा रहा है। कोर्ट ने साफ कहा कि माल्या को यह स्पष्ट करना होगा कि वह भारत लौटना चाहते हैं या नहीं। यदि वह देश नहीं लौटते हैं, तो उनकी अर्जी पर सुनवाई नहीं होगी।
आखिर विजय माल्या का मामला क्या है?
विजय माल्या को फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट के तहत फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर घोषित किया गया है। माल्या ने इस एक्ट की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए कोर्ट में केस किया था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि पिछले दिसंबर में भी बेंच ने कहा था कि केवल तभी उनकी अर्जी पर सुनवाई होगी जब वह भारत लौटकर भारतीय कानूनी प्रणाली का सामना करेंगे।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
मीडिया सूत्रों के अनुसार, हाई कोर्ट ने कहा: “विजय माल्या को देश लौटना होगा। अगर वह नहीं लौटते हैं तो उनकी अर्जी पर सुनवाई नहीं होगी। माल्या कोर्ट की प्रक्रिया से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए उन्हें कानूनी प्रक्रिया का फायदा नहीं मिलेगा। यह केस खारिज नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें एक और मौका दिया जा रहा है।”
ईडी की ओर से तुषार मेहता का तर्क
ईडी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस केस को लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि विजय माल्या ने इस कानून को तभी चुनौती दी थी जब उनकी पहचान भगोड़ा के तौर पर हुई। तुषार मेहता का दावा है कि माल्या ने यह केस तब दायर किया जब लंदन से भारत वापस लाने की प्रक्रिया चल रही थी।
तुषार मेहता ने कहा, “माल्या कभी भी भारत लौट सकते हैं। वह केवल इस देश में आकर ही अपने केस का सामना कर सकते हैं। यही कारण है कि कोर्ट ने उन्हें स्पष्ट संदेश दिया है।”
बॉम्बे हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि विजय माल्या भारत लौटे बिना किसी भी कानूनी राहत की उम्मीद नहीं कर सकते। कोर्ट ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है कि अब यह उनका आखिरी मौका है। अगर माल्या भारत लौटते हैं, तभी उनकी अर्जी पर सुनवाई होगी।