नयी दिल्लीः पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की प्रस्तावित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर देश की राजनीति और सुरक्षा तंत्र में हलचल मची हुई है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने 9 फरवरी को जारी अपने आधिकारिक बयान में साफ किया कि किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। प्रकाशक का साफ कहना है कि न तो प्रिंट और न ही डिजिटल किसी भी प्रारूप में कोई प्रति सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रकाशक ने कहा कि अगर कहीं भी कोई आंशिक या पूरी प्रति, PDF या अन्य डिजिटल रूप में उपलब्ध है, तो वह कॉपीराइट उल्लंघन है। उन्होंने अवैध प्रसार रोकने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
स्पेशल सेल जांच में, रक्षा मंत्रालय की मंजूरी लंबित
किताब के कथित लीक और डिजिटल प्रतियों के प्रसार के मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच स्पेशल सेल संभाल रही है, जो सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर प्रसार का डिजिटल ट्रेस खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लीक का स्रोत कहां से आया और क्या इसे संगठित तरीके से फैलाया गया। जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्रालय ने 2020–2024 के बीच 35 किताबों को मंजूरी दी, लेकिन ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ अभी लंबित है, इसलिए किसी भी प्रारूप में इसका प्रसार गैरकानूनी माना जा रहा है।
संसद में हंगामे का सिलसिला
संसद में नरवणे की किताब पर इस हंगामे की शुरुआत 2 फरवरी 2026 को हुई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जब लोकसभा में किताब के कुछ हिस्सों को पढ़ने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि उस अंश में 2020 के गलवान संघर्ष और भारत-चीन सीमा विवाद से जुड़े पूर्व सेना प्रमुख के कथित दावे शामिल थे। स्पीकर ने किताब अप्रकाशित होने के कारण अनुमति देने से इनकार किया। इसके बाद 4 फरवरी को राहुल गांधी ने संसद परिसर में किताब की हार्डकॉपी दिखाई और इसे प्रधानमंत्री को सौंपने का दावा किया। उन्होंने प्रकाशक के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि किताब ऑनलाइन उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि नरवणे ने 2023 में सोशल मीडिया पर इसके संकेत दिए थे। इस मुद्दे पर संसद में हंगामा हुआ और कई विपक्षी सांसद निलंबित हुए।
देश की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा
प्रकाशक ने 10 फरवरी तक दोबारा पुष्टि की कि किताब आधिकारिक रूप से जारी नहीं हुई है। पीडीएफ और प्रिंट प्रतियां सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर फैल रही हैं। खासकर पूर्व और वर्तमान सैनिकों के बीच। यह विवाद केवल किताब तक सीमित नहीं है। अब ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना की संवेदनशीलता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कॉपीराइट कानून पर बहस का मुद्दा बन गया है। प्रकाशक और पुलिस दोनों ने सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।